पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान पर वीएचपी का पलटवार, कहा- हिंदू विरोधी सोच से बाहर आएं
विश्व हिंदू परिषद ने पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी के हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता वाले बयान पर रविवार को हमला बोला। बंसल ने कहा कि भारत के बहुसंख्यक हिंदू समाज को देश के लिए खतरा बताने से पहले अंसारी को अपने सार्वजनिक जीवन का आइना देखना चाहिए।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

हामिद अंसारी के बयान पर गरमाई सियासत
पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी द्वारा हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद गहरा गया है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अंसारी पर तीखा हमला बोला है। वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने पूर्व उपराष्ट्रपति पर हिंदू विरोधी और कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।
यह पूरा विवाद शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ। इस कार्यक्रम में हामिद अंसारी ने संवैधानिक विशेषज्ञ एजी नूरानी को याद करते हुए नागरिक राष्ट्रवाद और देश के सामने मौजूद चुनौतियों पर चर्चा की थी। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के एक पुराने बयान का उल्लेख किया, जिसे लेकर अब राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है।
वीएचपी का तीखा हमला
वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हामिद अंसारी को बहुसंख्यक हिंदू समाज को खतरा बताने से पहले अपने सार्वजनिक जीवन का आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। बंसल ने आरोप लगाया कि अंसारी का कार्यकाल विवादों से भरा रहा है और उन्होंने अपने पद पर रहते हुए राष्ट्रीय हितों के बजाय अपनी विचारधारा को प्राथमिकता दी।
बंसल ने आगे कहा, 'उपराष्ट्रपति के पद पर रहते हुए आपकी पीएफआइ जैसे संगठनों के कार्यक्रमों में उपस्थिति रही है। राजदूत के रूप में भी आपके कार्यकाल पर कई सवाल उठते रहे हैं। आज आप हिंदुओं को सांप्रदायिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि यदि हिंदू समाज सचमुच सांप्रदायिक होता, तो आपको इस तरह के बयान देने की हिम्मत नहीं होती।'
अयोध्या फैसले और नेहरूवादी सोच पर सवाल
वीएचपी ने अंसारी द्वारा पूर्व में अयोध्या मामले पर दिए गए बयानों को भी आड़े हाथों लिया। विनोद बंसल ने कहा कि भारत में मस्जिदों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है, जो यहां की धर्मनिरपेक्षता का प्रमाण है। उन्होंने आरोप लगाया कि अंसारी श्रीराम जन्मभूमि के ऐतिहासिक फैसले की आलोचना कर अपनी कट्टरपंथी सोच का परिचय दे चुके हैं।
बंसल ने अंसारी को सलाह दी कि वे नेहरूवादी और जिन्नावादी मानसिकता से बाहर निकलें। उन्होंने कहा, 'देश ने आपको सर्वोच्च पद, सम्मान और प्रतिष्ठा दी है। आपको इस देश के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए, न कि एहसान फरामोश बनकर समाज को बांटने वाली बातें करनी चाहिए। अगली बार दूसरों को उपदेश देने से पहले आपको आईने में अपना प्रतिबिंब देखना चाहिए।'
विवाद की पृष्ठभूमि
हामिद अंसारी ने अपने संबोधन में एजी नूरानी की पुस्तक 'द आरएसएस: अ मेनेस टू इंडिया' का जिक्र किया था। उन्होंने नेहरू के उस बयान को दोहराया जिसे पूर्व विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया ने दर्ज किया था। अंसारी का तर्क था कि भारत में नागरिक राष्ट्रवाद के सामने उभरते रुझान चिंताजनक हैं। हालांकि, उनके इस रुख को लेकर अब दक्षिणपंथी संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है और इसे देश के बहुसंख्यक समाज को बदनाम करने की कोशिश करार दिया है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!