वाराणसी में साइबर अपराधियों पर नकेल: पुलिस ने तैयार किया 58 गैंग्स के खात्मे का ब्लूप्रिंट
वाराणसी में साइबर ठगी की शिकायतों और कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस अब कठोर से कठोर एक्शन लेगी। अपराधियों को मात देने के लिए वाराणसी की साइबर क्राइम टीम अपनी पुलिसिंग में भी बदलाव करेगी।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

साइबर अपराधियों के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की तैयारी
वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट ने साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए एक नई और आक्रामक रणनीति तैयार की है। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि साइबर ठगी के मामलों में केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर, अपराधियों के पूरे नेटवर्क और उनके आर्थिक साम्राज्य को ध्वस्त किया जाएगा। इस विशेष अभियान के तहत पुलिस अब उन सभी मददगारों पर भी शिकंजा कसेगी जो फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराने, म्यूल अकाउंट खोलने या अवैध कॉल सेंटर चलाने में संलिप्त हैं।
पुलिस की कार्ययोजना के अनुसार, कार्रवाई को तीन चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण में मुख्य अपराधियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी, दूसरे चरण में उनके सहयोगियों और नेटवर्क के अन्य सदस्यों को पकड़ा जाएगा, जबकि तीसरे चरण में अपराधियों द्वारा अवैध तरीके से अर्जित की गई संपत्तियों और वित्तीय स्रोतों को निशाना बनाया जाएगा। ऐसे सभी अपराधियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
15 दिन में रिपोर्ट और निगरानी का कड़ा निर्देश
पुलिस कमिश्नर ने तीनों जोन के साइबर प्रभारियों को निर्देशित किया है कि वे लंबित मामलों की हर 15 दिन में समीक्षा करें और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इसके अलावा, चिह्नित स्थानीय अपराधियों की गतिविधियों पर निरंतर निगरानी रखने और उनके मोबाइल नंबरों को ट्रैक करने के लिए कहा गया है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जेल जाने के बाद भी अपराधियों का नेटवर्क सक्रिय न रह सके।
हाल ही में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में साइबर टीम ने अपना एक साल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। इस दौरान बताया गया कि पिछले एक वर्ष में वाराणसी पुलिस ने 58 साइबर गैंग का पर्दाफाश किया है और 277 अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा है। डिजिटल अरेस्ट के मामलों में भी पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए 36 अपराधियों को गिरफ्तार किया और भारी मात्रा में नकदी व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए।
वित्तीय सुरक्षा और जागरूकता पर जोर
साइबर पुलिस की सक्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक साल में 25 करोड़ रुपये की ठगी की रकम को होल्ड कराया गया, जिसमें से 4.5 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए गए हैं। इसके साथ ही, अपराध में इस्तेमाल होने वाले 10,176 मोबाइल नंबर और 8,262 IMEI नंबरों को ब्लॉक किया गया है। पुलिस ने 21 शातिर अपराधियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की है।
अवैध कॉल सेंटरों के खिलाफ अभियान चलाते हुए पुलिस ने 15 केंद्रों का भंडाफोड़ किया और 175 लोगों को गिरफ्तार किया। ये गिरोह मुख्य रूप से निवेश के नाम पर, विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर और नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों को ठगते थे। पुलिस ने 16,982 से अधिक एनसीआरपी (NCRP) शिकायतों का निस्तारण किया है।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि केवल दंडात्मक कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, इसलिए जागरूकता अभियान को भी तेज किया गया है। अब तक स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर 25 हजार से अधिक लोगों को साइबर ठगी से बचने के उपाय बताए गए हैं। भविष्य में पुलिस का ध्यान तकनीक के साथ-साथ जमीनी स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत करने पर भी रहेगा ताकि साइबर अपराधियों के किसी भी नए मॉड्यूल को पनपने से पहले ही रोका जा सके।
इस बैठक में डीसीपी अपराध नीतू, डीसीपी राजेश कुमार पाण्डेय, एडीसीपी अपराध नृपेन्द्र सहित सभी जोन के साइबर प्रभारी और नोडल अधिकारी मौजूद रहे। पुलिस प्रशासन का मानना है कि इस नई कार्यप्रणाली से साइबर अपराधों में कमी आएगी और आम जनता के साथ होने वाली वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!