यूपी में सरकारी स्कूल बंद नहीं होंगे, कम छात्रों वाले विद्यालयों के विलय पर मंत्री ने दी सफाई
उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों को बंद किए जाने के विपक्ष के आरोपों के बीच बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने किसी भी सरकारी स्कूल को बंद करने का फैसला नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि सभी विद्यालय संचालित रहेंगे।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

उत्तर प्रदेश में सरकारी परिषदीय विद्यालयों को बंद किए जाने की चर्चाओं के बीच बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि राज्य सरकार की ओर से किसी भी सरकारी स्कूल को बंद करने का निर्णय नहीं लिया गया है। मंत्री ने विपक्ष के उन दावों को सिरे से खारिज किया है जिनमें स्कूलों को बंद करने की बात कही जा रही थी।
विलय की प्रक्रिया और प्री-प्राइमरी शिक्षा का विस्तार
मंत्री संदीप सिंह ने स्पष्ट किया कि जिन विद्यालयों में छात्रों की संख्या अत्यंत कम है, उन्हें केवल निकटतम विद्यालयों में समायोजित किया जाएगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना है। उन्होंने जानकारी दी कि जिन स्कूल भवनों में छात्र संख्या कम होने के कारण विलय किया जाएगा, उन खाली परिसरों का उपयोग प्रदेश में पहली बार शुरू की जा रही प्री-प्राइमरी कक्षाओं के संचालन के लिए किया जाएगा। इससे छोटे बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा।
संदीप सिंह ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दल आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का एकमात्र लक्ष्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है।
शिक्षा बजट और नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि
राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में किए गए निवेश के आंकड़े भी साझा किए। मंत्री के अनुसार, पिछली सरकार के कार्यकाल में शिक्षा बजट लगभग 28 हजार करोड़ रुपये था, जो वर्तमान सरकार के दौरान बढ़कर 1.13 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। यह वृद्धि राज्य में शिक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, परिषदीय विद्यालयों में छात्रों का नामांकन 1.34 करोड़ से बढ़कर 1.90 करोड़ तक पहुंच गया है। इसके साथ ही, ड्रॉपआउट दर में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जो पहले 19 प्रतिशत थी और अब घटकर मात्र 3 प्रतिशत रह गई है। 'ऑपरेशन कायाकल्प' के माध्यम से स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और शैक्षणिक मानकों में व्यापक सुधार किए गए हैं।
पूर्ववर्ती सरकार पर तीखे हमले
संदीप सिंह ने पूर्ववर्ती सपा सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को खराब करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नकल विरोधी अध्यादेश को समाप्त करने के कारण शिक्षा प्रणाली में अनियमितताएं बढ़ी थीं। उन्होंने 2014 और 2015 की विभिन्न परीक्षाओं में हुए पेपर लीक और साल्वर गैंग के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि उस दौरान छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया था।
मंत्री ने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने न केवल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है, बल्कि पाठ्यक्रम को भी अधिक उपयोगी बनाया है। उन्होंने कहा कि 19 मानकों पर आधारित कायाकल्प योजना के तहत स्कूलों की उपलब्धि दर 36 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो शिक्षा के स्तर में आए बड़े बदलाव का प्रमाण है।
अंत में, सरकार ने दोहराया कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। स्कूलों के विलय की नीति केवल प्रशासनिक दक्षता और बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने के उद्देश्य से लागू की जा रही है, न कि किसी संस्थान को बंद करने के लिए।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!