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उदयपुर: शिक्षा के नाम पर आदिवासी बच्चों की तस्करी और धर्मान्तरण का बड़ा रैकेट बेनकाब, गोवा से रेस्क्यू किए गए बच्चे

उदयपुर संभाग में शिक्षा के बहाने गरीब और आदिवासी बच्चों को राजस्थान से बाहर ले जाकर उनका धर्मान्तरण कराने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस गंभीर मामले को लेकर उदयपुर के सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

18 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
उदयपुर: शिक्षा के नाम पर आदिवासी बच्चों की तस्करी और धर्मान्तरण का बड़ा रैकेट बेनकाब, गोवा से रेस्क्यू किए गए बच्चे
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शिक्षा का झांसा देकर बच्चों को ले जा रहा था गिरोह

राजस्थान के उदयपुर संभाग में गरीब और आदिवासी परिवारों के बच्चों को शिक्षा का लालच देकर राज्य से बाहर ले जाने और उनके धर्मान्तरण का एक गंभीर मामला सामने आया है। गिरोह के सदस्य इन मासूमों को बहला-फुसलाकर पहले अहमदाबाद ले गए और वहां से ट्रेन के जरिए गोवा पहुंचा दिया। योजना के अनुसार, इन बच्चों को आगे तमिलनाडु भेजने की तैयारी थी, लेकिन गोवा में स्थानीय प्रशासन की सतर्कता के चलते यह साजिश विफल हो गई।

रेस्क्यू किए गए बच्चों में दो लड़कियां और पांच लड़के शामिल हैं, जिनकी आयु 7 से 12 वर्ष के बीच है। ये सभी बच्चे उदयपुर जिले की झाड़ोल तहसील के विभिन्न गांवों के निवासी हैं। गोवा की बाल कल्याण समिति को जब एक साथ इतने बच्चों की संदिग्ध उपस्थिति की सूचना मिली, तो उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचित किया। इसके बाद उदयपुर से पुलिस और बाल कल्याण समिति की एक संयुक्त टीम गोवा पहुंची और शनिवार को सभी बच्चों को सुरक्षित वापस उदयपुर ले आई।

सांसद ने की एनआईए और सीबीआई जांच की मांग

इस घटना ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। उदयपुर के सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने इस मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। सांसद ने आरोप लगाया है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे ईसाई मिशनरियों का हाथ है और यह एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय व अंतरराज्यीय साजिश का हिस्सा हो सकता है।

सांसद ने मांग की है कि मामले की जांच एनआईए (NIA), सीबीआई (CBI) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाए। उन्होंने एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन पर भी जोर दिया है ताकि इस गिरोह के डिजिटल लेन-देन और फंडिंग के स्रोतों का पता लगाया जा सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

पहले भी तमिलनाडु भेजे जा चुके हैं बच्चे

प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय है। पूछताछ में सामने आया कि उदयपुर संभाग से पहले भी कई बच्चों को तमिलनाडु भेजा जा चुका है। अब तक करीब 15 ऐसे बच्चों की जानकारी मिली है जिन्हें इसी तरह के प्रलोभन देकर बाहर भेजा गया था। बच्चों ने खुद स्वीकार किया कि वे झाड़ोल में भी चर्च जाया करते थे, जिससे धर्मान्तरण के प्रयासों की पुष्टि होती है।

वर्तमान में, रेस्क्यू किए गए बच्चों के माता-पिता और संबंधित ग्रामीणों से गहन पूछताछ की जा रही है। बाल कल्याण समिति और पुलिस प्रशासन की पूरी जांच प्रक्रिया के बाद ही बच्चों को उनके परिजनों को सौंपा जाएगा। विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए उच्च अधिकारियों से इस रैकेट को जड़ से खत्म करने की मांग की है।

बदलते तौर-तरीके और सुरक्षा की चुनौती

सांसद डॉ. रावत के अनुसार, कानुवाड़ा, बिछीवाड़ा और कलिंजरा जैसे इलाकों में पहले भी इस तरह के 15 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। जब स्थानीय स्तर पर लोगों में जागरूकता बढ़ी और विरोध शुरू हुआ, तो गिरोह ने अपने काम करने का तरीका बदल लिया। अब वे बच्चों को मुफ्त शिक्षा का सपना दिखाकर दूसरे राज्यों में ले जाते हैं ताकि वहां उन्हें उनकी मूल संस्कृति से दूर कर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जा सके।

प्रशासन अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि इन बच्चों को ले जाने के पीछे कौन से स्थानीय मददगार शामिल थे और क्या इस गिरोह का कोई बड़ा नेटवर्क उदयपुर के गांवों में सक्रिय है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड और उनके सहयोगियों की पहचान स्पष्ट हो पाएगी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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