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उदयपुर प्लॉट घोटाला: पूर्व अल्पसंख्यक अधिकारी और उनके पति को 5 दिन की एसओजी रिमांड

उदयपुर नगर निगम के 272 प्लॉट के बहुचर्चित घोटाले मामले में गिरफ्तार हुए एक महिला और उसके पति को बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें 5 दिन की रिमांड पर भेजा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

5 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
उदयपुर प्लॉट घोटाला: पूर्व अल्पसंख्यक अधिकारी और उनके पति को 5 दिन की एसओजी रिमांड
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उदयपुर नगर निगम के बहुचर्चित 272 प्लॉट घोटाले मामले में एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस मामले में गिरफ्तार की गई पूर्व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी और उनके पति को बुधवार को स्थानीय अदालत में पेश किया गया। अदालत ने दोनों आरोपियों को पूछताछ के लिए 5 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। रिमांड अवधि के दौरान एसओजी टीम आरोपियों से बेनामी संपत्ति और घोटाले से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर गहन पूछताछ करेगी।

फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों का खेल

इस घोटाले का खुलासा साल 2022 में हुआ था, जिसके बाद मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने नगर निगम के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर हिरण मगरी सेक्टर-11 स्थित निगम के भूखंड संख्या 546 के फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे। इन दस्तावेजों में एक काल्पनिक व्यक्ति 'किशन पटेल' का नाम इस्तेमाल कर निगम से लीज डीड और नामांतरण पत्र जारी करवा लिए गए। बाद में, इस प्लॉट को सलूंबर निवासी अनिल कचौरिया को 50.01 लाख रुपये में बेच दिया गया।

एसओजी की जांच में यह भी पता चला है कि इस पूरे नेटवर्क में पैसों का लेनदेन काफी व्यवस्थित तरीके से किया गया था। पूर्व में गिरफ्तार किए गए आरोपी राजेंद्र धाकड़ ने पूछताछ में खुलासा किया था कि उसने एकलव्य बस्ती निवासी किशनलाल गमेती के बैंक खाते में 7 लाख रुपये जमा कराए थे। यह राशि बाद में अन्य बिचौलियों के माध्यम से मुख्य आरोपियों तक पहुंचाई गई थी।

यूडीए की जमीनों पर कब्जे का इतिहास

मामले की पृष्ठभूमि में जाएं तो वर्ष 2012 में यूडीए (उदयपुर विकास प्राधिकरण) ने नगर निगम को कई कॉलोनियां हस्तांतरित की थीं। इन कॉलोनियों में कई भूखंड खाली थे, जिनमें से अधिकांश कॉर्नर के प्लॉट थे। निगम द्वारा इन जमीनों की उचित देखभाल न किए जाने का फायदा उठाकर भू-माफियाओं ने इन पर अवैध कब्जे कर लिए। कई मामलों में फर्जी दस्तावेज बनाकर नामांतरण खुलवाए गए और उन्हें दलालों के माध्यम से बेच दिया गया।

इस घोटाले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे करीब 500 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला बताया जा रहा है। इस मुद्दे को सबसे पहले 2022 में कांग्रेस पार्षद अजय पोरवाल ने उठाया था, जिसके बाद नगर निगम ने जांच करते हुए 48 पट्टों को निरस्त कर दिया था।

राजनीतिक हलकों में भी गूंजा मुद्दा

यह मामला केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बना रहा। पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया और उदयपुर शहर के वर्तमान विधायक ताराचंद जैन ने भी इस घोटाले को लेकर कई बार सवाल उठाए हैं। अप्रैल 2022 से एसओजी इस पूरे मामले की परतें खोलने में जुटी है।

एसओजी ने इस जांच के दौरान अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें गुजरात के पंचमहल के पूर्व वार्ड पंच राकेश सोलंकी, उदयपुर निवासी दीपक सिंह और किशनलाल शामिल हैं। अब पूर्व अल्पसंख्यक अधिकारी और उनके पति की गिरफ्तारी के बाद एसओजी को उम्मीद है कि इस घोटाले के पीछे के मास्टरमाइंड और बेनामी संपत्तियों के बारे में और भी ठोस सुराग मिल सकेंगे।

वर्तमान में एसओजी की टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस घोटाले से अर्जित की गई अवैध राशि का निवेश कहां-कहां किया गया है। रिमांड के दौरान मिलने वाले इनपुट के आधार पर आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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