टीकमगढ़ में राशन वितरण में बड़ा फर्जीवाड़ा: 62 लाख से अधिक के गबन पर 7 संचालकों पर एफआईआर के आदेश
टीकमगढ़ जिले में सरकारी राशन वितरण में बड़े घोटाले का खुलासा होने के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। कलेक्टर विवेक श्रोतिय ने जिले की 7 सरकारी राशन दुकानों के संचालकों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में सरकारी राशन वितरण प्रणाली में एक बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। जिले में गरीबों के लिए आवंटित गेहूं, चावल, शक्कर और नमक के वितरण में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और कालाबाजारी की पुष्टि हुई है। इस गंभीर अनियमितता के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए सात राशन दुकान संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
62.78 लाख रुपये का गबन
जिला कलेक्टर विवेक श्रोतिय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। जांच में सामने आया है कि इन सात दुकानों के माध्यम से कुल 62.78 लाख रुपये मूल्य के राशन का गबन किया गया है। यह राशन सीधे तौर पर उन गरीब परिवारों के लिए था, जिन्हें सरकारी योजनाओं के तहत रियायती दरों पर खाद्य सामग्री मिलनी चाहिए थी।
लंबे समय से स्थानीय निवासियों और विशेषकर महिलाओं द्वारा राशन वितरण में धांधली की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इन शिकायतों के आधार पर जब प्रशासन ने भौतिक सत्यापन और रिकॉर्ड की जांच की, तो कागजों पर दर्ज स्टॉक और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर पाया गया। कालाबाजारी के इस खेल ने सरकारी वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
इन संचालकों पर गिरी गाज
प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार, जिन संचालकों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है, उनमें छिपरी दुकान के जितेंद्र अहिरवार, बिजरावन के उत्तम अहिरवार, बजीतपुरा की दुर्गेश नंदिनी ईंधन आपूर्ति सहकारी समिति के बैजनाथ अहिरवार और बड़ागांव की प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति की ज्योति यादव शामिल हैं। इसके अलावा, सुरजपुर के लक्ष्मण लोधी और जगन्नाथ लोधी, भेलसी के चंद्रप्रकाश सुडेले और अजनौर की महिला बहुउद्देशीय सहकारी समिति के अरविंद सिंह लोधी के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि सरकारी राशन में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और वितरण प्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी बनाया जाए। इस कार्रवाई से जिले के अन्य राशन दुकान संचालकों में भी हड़कंप मच गया है।
प्रशासनिक सख्ती और आगे की राह
मामले की जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद अब विस्तृत जांच की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले में और कौन-कौन से लोग शामिल हैं। क्या यह केवल संचालकों की मिलीभगत थी या इसमें विभाग के किसी उच्च अधिकारी की भी संलिप्तता है, यह जांच का विषय है। प्रशासन ने जब्त किए गए रिकॉर्ड्स को सुरक्षित कर लिया है और फॉरेंसिक ऑडिट की भी संभावना जताई जा रही है।
टीकमगढ़ प्रशासन का यह कदम उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के बजाय गरीबों के हक का राशन हड़पने की कोशिश करते हैं। फिलहाल, पुलिस प्रशासन द्वारा एफआईआर की प्रक्रिया पूरी की जा रही है और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना है। स्थानीय लोग इस कार्रवाई का स्वागत कर रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि जल्द ही दोषियों को सजा मिलेगी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!