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संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, याचिकाओं पर कल होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। इन याचिकाओं में NEET पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा ज्यादती करने का आरोप लगाया गया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

26 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, याचिकाओं पर कल होगी सुनवाई
मूल स्रोत

नीट पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए कथित बल प्रयोग का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत सोमवार को इस संबंध में दायर दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इन याचिकाओं में 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच करेगी मामले की समीक्षा

27 जुलाई को जारी कॉज लिस्ट के अनुसार, इन याचिकाओं को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है। इससे पहले 24 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को अवगत कराया था कि पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया है। अदालत ने इन दलीलों पर संज्ञान लेते हुए सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की थी।

संसद मार्च के दौरान जंतर-मंतर से शुरू हुआ प्रदर्शन हिंसक हो गया था, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। इस दौरान पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया, जबकि प्रदर्शनकारियों की ओर से भी पथराव की खबरें सामने आई थीं। इस पूरे घटनाक्रम में 100 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना है।

दिल्ली हाईकोर्ट में भी जारी है कानूनी प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट के अलावा, दिल्ली हाईकोर्ट में भी इस मामले से जुड़ी दो याचिकाएं पहले से लंबित हैं। हाईकोर्ट ने 22 जुलाई को केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज और वीडियोग्राफी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखें ताकि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण मार्च को बलपूर्वक दबाने की कोशिश की। मार्च के दौरान बैरिकेड्स तोड़े गए और प्रदर्शनकारी कर्तव्य पथ व विजय चौक होते हुए संसद के करीब तक पहुंच गए थे, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी।

आंदोलन का समापन और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

यह पूरा आंदोलन 3 मई को नीट पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ था, जो 36 दिनों तक चला। अंततः शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। इसी के साथ, छात्रों के समर्थन में अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने भी सरकार के आश्वासन के बाद अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी है।

इस मुद्दे पर राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज है। राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने और सादे कपड़ों में तैनात लोगों की पहचान को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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