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सोहना स्ट्रीट लाइट घोटाला: 80 लाख की धांधली में पूर्व चीफ इंजीनियर और सचिवों समेत 11 पर FIR

गुरग्राम जिले में नगर परिषद सोहना में वर्ष 2014-15 के दौरान हुए करीब 4.87 करोड़ रुपए के स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट में कथित अनियमितताओं का मामला अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) तक पहुंच गया है। प्राथमिक जांच के बाद एसीबी ने मामले में तत्कालीन अधिकारियों, नगर परिषद के सचिवों और ठेकेदारों समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

12 सितंबर 20263 मिनट पढ़ें
सोहना स्ट्रीट लाइट घोटाला: 80 लाख की धांधली में पूर्व चीफ इंजीनियर और सचिवों समेत 11 पर FIR
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गुरुग्राम जिले के सोहना नगर परिषद में वर्ष 2014-15 के दौरान हुए स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट में बड़ी वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने इस मामले में प्राथमिक जांच पूरी करने के बाद 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इस घोटाले में सरकारी खजाने को 80 लाख रुपये से अधिक का चूना लगाने का आरोप है।

4.87 करोड़ के प्रोजेक्ट में खेल

यह मामला करीब एक दशक पुराने उस प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जिसे सोहना में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए शुरू किया गया था। कुल 4.87 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में नियमों को ताक पर रखकर काम किए गए। जांच में पाया गया कि स्ट्रीट लाइट के लिए खरीदी गई सामग्री की दरें बाजार मूल्य से 20 से 25 प्रतिशत तक अधिक थीं, जिससे सरकारी धन का बड़ा हिस्सा निजी जेबों में गया।

आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों ने मिलीभगत कर सरकारी नियमों का उल्लंघन किया। न केवल सामग्री की खरीद में हेरफेर की गई, बल्कि काम आवंटन की प्रक्रिया में भी पारदर्शिता नहीं बरती गई। एसीबी की प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि इस पूरे खेल के पीछे एक सोची-समझी साजिश थी, जिसका उद्देश्य सरकारी फंड का दुरुपयोग करना था।

लाइसेंस क्षमता से अधिक काम का आवंटन

घोटाले का एक मुख्य पहलू ठेकेदारों को नियमों के विपरीत काम देना है। सरकारी निर्माण कार्यों में ठेकेदारों की श्रेणी और उनकी लाइसेंस क्षमता के आधार पर काम आवंटित करने का प्रावधान है। हालांकि, इस प्रोजेक्ट में उन ठेकेदारों को काम दिया गया, जिनके पास उस स्तर के कार्य को पूरा करने की क्षमता ही नहीं थी। अधिकारियों ने इन नियमों को दरकिनार कर ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया।

एसीबी अब इस बात की जांच कर रही है कि किन अधिकारियों ने इन ठेकेदारों को काम देने की सिफारिश की थी और इसके बदले में किस प्रकार का लेनदेन हुआ। जांच एजेंसी टेंडर प्रक्रिया से लेकर भुगतान तक की फाइलों को खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि नियमों को तोड़ने के लिए किस स्तर पर दबाव बनाया गया था।

पूर्व चीफ इंजीनियर और सचिव भी घेरे में

इस मामले में दर्ज एफआईआर में केवल निचले स्तर के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि उच्च अधिकारी भी शामिल हैं। नामजद आरोपियों में निदेशालय के तत्कालीन चीफ इंजीनियर, एसडीओ और नगर परिषद के दो पूर्व सचिव शामिल हैं। इनके अलावा तीन ठेकेदारों को भी आरोपी बनाया गया है। इन अधिकारियों की भूमिका प्रशासनिक और तकनीकी मंजूरी देने में संदिग्ध पाई गई है।

जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रोजेक्ट की फाइलें किन-किन अधिकारियों की मेजों से होकर गुजरीं और किसने इन अनियमितताओं पर अपनी सहमति की मुहर लगाई। अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी धांधली होना संभव नहीं था, इसलिए अब हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी।

एसीबी ने अब मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। इसमें टेंडर दस्तावेज, वर्क ऑर्डर, बिल और भुगतान के रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की जाएगी। जांच के दौरान यदि अन्य अधिकारियों या व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। वित्तीय नुकसान की सटीक राशि विस्तृत ऑडिट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

करीब दस साल पुराने इस मामले के फिर से खुलने से सोहना नगर परिषद के तत्कालीन कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एसीबी की इस कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में समय बीत जाने के बाद भी जांच से बचा नहीं जा सकता। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विस्तृत जांच में और कौन-कौन से चेहरे बेनकाब होते हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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