नवादा आकाशीय बिजली हादसा: सीतामढ़ी के मधेसरा गांव में एक साथ उठी तीन मजदूरों की अर्थियां, पसरा मातम
सीतामढ़ी के मधेसरा गांव में बुधवार शाम उस समय मातम छा गया जब नवादा जिले में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से जान गंवाने वाले तीन मजदूरों के शव एक साथ पहुंचे। मृतकों की पहचान मधेसरा वार्ड-11 निवासी राजेंद्र माझी (25), मन्नी माझी (45) और इनरजीत माझी (28) के रूप में हुई है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

एक साथ तीन शव पहुंचने से मधेसरा में छाया सन्नाटा
सीतामढ़ी जिले के मधेसरा गांव में बुधवार की शाम बेहद गमगीन माहौल में गुजरी। नवादा जिले में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से जान गंवाने वाले तीन मजदूरों के शव जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंचे, पूरे इलाके में कोहराम मच गया। मृतकों की पहचान मधेसरा वार्ड-11 के निवासी 25 वर्षीय राजेंद्र माझी, 45 वर्षीय मन्नी माझी और 28 वर्षीय इनरजीत माझी के रूप में हुई है। एक ही गांव के तीन लोगों की असमय मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।
एक ही वार्ड के तीन पड़ोसियों की अर्थियां एक साथ उठते देख वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। परिजनों का विलाप सुनकर ग्रामीणों का कलेजा फट पड़ा। यह हृदयविदारक दृश्य देखकर गांव की गलियों में सन्नाटा पसर गया। इन मजदूरों की मौत से उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, क्योंकि ये तीनों ही अपने-अपने परिवारों के एकमात्र सहारा थे।
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
राजेंद्र माझी के परिवार की स्थिति सबसे अधिक दयनीय है। उनके पीछे वृद्ध पिता रामप्रीत माझी, मां और आठ माह की गर्भवती पत्नी नीरकल देवी हैं। जिस घर में जल्द ही नन्हे बच्चे की किलकारी गूंजने की उम्मीद थी, वहां अब मातम पसरा है। वहीं, 45 वर्षीय मन्नी माझी अपने पीछे मां, पत्नी चौड़पनिया देवी और चार बच्चों को छोड़ गए हैं। मन्नी के पिता का पहले ही निधन हो चुका था, जिससे परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी।
इनरजीत माझी के परिवार का भी बुरा हाल है। 28 वर्षीय इनरजीत के परिवार में पिता इंदल माझी, मां, पत्नी रेखा देवी और दो छोटे बच्चे हैं। उनका सबसे छोटा बेटा अभी महज एक माह का है, जिसे यह भी नहीं पता कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है। इन परिवारों की आर्थिक स्थिति पहले से ही काफी कमजोर थी और अब कमाऊ सदस्य के चले जाने से उनके सामने भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है।
धान की रोपनी के लिए गए थे बाहर
मृतक मजदूर और उनके साथ घायल हुए रघुवीर करीब 15 दिन पहले ही मजदूरी की तलाश में घर से निकले थे। नवादा जिले के रजौली थाना क्षेत्र के दरियापुर गांव में ये सभी धान की रोपनी का काम कर रहे थे, तभी अचानक हुई आकाशीय बिजली की घटना ने उनकी जान ले ली। गरीबी के कारण ये लोग अपने परिवार का पेट पालने के लिए दूसरे जिलों में जाकर मेहनत-मजदूरी करने को मजबूर थे।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। बीडीओ मृत्युंजय कुमार और सरपंच जहांगीर अहमद खां ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों को सांत्वना दी। बीडीओ ने परिजनों को हर संभव सरकारी सहायता दिलाने का ठोस आश्वासन दिया है। इसके साथ ही उन्होंने मुखिया मधुकर झा को कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं ताकि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
प्रशासनिक आश्वासन और भविष्य की चिंता
हालांकि सरकारी मदद का आश्वासन दिया गया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इन परिवारों की भरपाई करना असंभव है। प्रशासन की ओर से दी जाने वाली सहायता राशि इन परिवारों के भविष्य के लिए एक छोटी सी राहत हो सकती है, लेकिन अपनों को खोने का दर्द कभी कम नहीं होगा। फिलहाल, गांव में शोक की लहर है और स्थानीय लोग पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाने में जुटे हैं।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!