सिरसा: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की कठोर कैद, कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना
कोर्ट ने दोषी हरप्रीत सिंह को कठोर कारावास के अलावा 52 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने जुर्माना राशि में से 40 हजार रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने के आदेश दिए हैं।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

सिरसा की अदालत का बड़ा फैसला: नाबालिग से रेप के दोषी को 20 साल की सजा
हरियाणा के सिरसा जिले में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. नरेश कुमार सिंघल की अदालत ने इस मामले में सुनवाई पूरी करते हुए दोषी हरप्रीत सिंह को कारावास के साथ-साथ आर्थिक दंड भी लगाया है।
अदालत के आदेशानुसार, दोषी पर कुल 52 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस राशि को लेकर कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जुर्माने के रूप में जमा होने वाली कुल राशि में से 40 हजार रुपये पीड़िता को मुआवजे के तौर पर दिए जाएंगे। यह फैसला न्याय प्रणाली की संवेदनशीलता को दर्शाता है, जिसमें अपराध की गंभीरता को देखते हुए सजा और मुआवजे का प्रावधान किया गया है।
दो साल पुरानी घटना और पुलिस की कार्रवाई
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, यह घटना करीब दो साल पहले डबवाली क्षेत्र में घटित हुई थी। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया था कि आरोपी हरप्रीत सिंह ने जनवरी 2024 में उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था। इतना ही नहीं, आरोपी ने पीड़िता को इस घटना के बारे में किसी को भी बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी थी, जिससे पीड़िता काफी समय तक भय के साये में रही।
पीड़िता की हिम्मत और परिजनों के सहयोग के बाद, 25 जुलाई 2024 को डबवाली महिला पुलिस थाना में बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने शिकायत मिलते ही त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़िता की काउंसलिंग कराई और उसका मेडिकल परीक्षण करवाया। जांच के दौरान पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को जुटाकर एक मजबूत केस तैयार किया।
ठोस साक्ष्यों के आधार पर मिली सजा
पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, जांच टीम ने पीड़िता के बयानों, चिकित्सकीय साक्ष्यों और अन्य महत्वपूर्ण सबूतों को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप कोर्ट में पेश किया। आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद उसके खिलाफ चालान पेश किया गया। कोर्ट में चली लंबी सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने प्रभावी पैरवी की, जिसके चलते अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।
अदालत ने अपने फैसले में आरोपी द्वारा किए गए अपराध की गंभीरता और पीड़िता को दी गई धमकियों को संज्ञान में लिया। 20 साल की कठोर कारावास की यह सजा न केवल आरोपी के लिए एक सबक है, बल्कि समाज में इस तरह के अपराधों के खिलाफ एक कड़ा संदेश भी है। पुलिस द्वारा समय पर की गई वैज्ञानिक जांच और कोर्ट की त्वरित सुनवाई ने पीड़िता को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
न्याय की दिशा में एक कदम
इस मामले में पीड़िता को मिलने वाला मुआवजा उसे समाज की मुख्यधारा में वापस लाने और उसके पुनर्वास में सहायक सिद्ध होगा। सिरसा की इस फास्ट ट्रैक कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया है कि नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराधों में न्याय में देरी न हो। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के फैसलों से अपराधियों में कानून का डर बना रहता है और पीड़ितों का न्याय प्रणाली पर भरोसा बढ़ता है।
वर्तमान में, यह मामला सिरसा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस प्रशासन ने भी इस मामले में त्वरित कार्रवाई के लिए अपनी टीम की सराहना की है। अदालत का यह निर्णय उन सभी के लिए एक उदाहरण है जो कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश करते हैं। अब दोषी को अपनी सजा काटने के लिए जेल भेज दिया गया है, और मामले की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!