ब्रेकिंग
उदयपुर: पुलिस हिरासत से चकमा देकर भागे दो नाबालिग चोर, पहाड़ियों में तलाश जारीभोपाल के कटारा हिल्स में तेंदुए की दस्तक: रिहायशी इलाकों में दहशत, पार्क में आवाजाही पर लगी रोकग्वालियर में हनीट्रैप का खौफ: ब्लैकमेलिंग से तंग आकर युवक ने की आत्महत्या, दंपति पर केस दर्जलखनऊ: लारी कार्डियोलॉजी सेंटर में हर साल 8500 से ज्यादा हार्ट अटैक मरीजों को मिल रहा नया जीवनसुपौल: अवैध लेनदेन के विवाद में युवक का अपहरण, पुलिस ने 12 घंटे के भीतर सकुशल कराया बरामदकरौली की बेटी प्रिया गुप्ता का कमाल: पहले ही प्रयास में NEET-PG में लहराया सफलता का परचमधौलपुर: पिकअप हादसे में 4 मौतों के बाद प्रशासन सख्त, पोखर किनारे से हटाए गए अवैध निर्माणझांसी के कारोबारी का रहस्यमय परिस्थितियों में निधन, मध्य प्रदेश की नदी में मिला शव
उदयपुर: पुलिस हिरासत से चकमा देकर भागे दो नाबालिग चोर, पहाड़ियों में तलाश जारीभोपाल के कटारा हिल्स में तेंदुए की दस्तक: रिहायशी इलाकों में दहशत, पार्क में आवाजाही पर लगी रोकग्वालियर में हनीट्रैप का खौफ: ब्लैकमेलिंग से तंग आकर युवक ने की आत्महत्या, दंपति पर केस दर्जलखनऊ: लारी कार्डियोलॉजी सेंटर में हर साल 8500 से ज्यादा हार्ट अटैक मरीजों को मिल रहा नया जीवनसुपौल: अवैध लेनदेन के विवाद में युवक का अपहरण, पुलिस ने 12 घंटे के भीतर सकुशल कराया बरामदकरौली की बेटी प्रिया गुप्ता का कमाल: पहले ही प्रयास में NEET-PG में लहराया सफलता का परचमधौलपुर: पिकअप हादसे में 4 मौतों के बाद प्रशासन सख्त, पोखर किनारे से हटाए गए अवैध निर्माणझांसी के कारोबारी का रहस्यमय परिस्थितियों में निधन, मध्य प्रदेश की नदी में मिला शव

सिरोही बाईपास एलाइनमेंट मामला: हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब

राजस्थान हाईकोर्ट ने एनएच-168 सिरोही बाईपास के एलाइनमेंट को लेकर दायर जनहित याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

27 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
सिरोही बाईपास एलाइनमेंट मामला: हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब
मूल स्रोत

सिरोही बाईपास के एलाइनमेंट पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख

राजस्थान हाईकोर्ट ने एनएच-168 सिरोही बाईपास के एलाइनमेंट को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने इस मामले में दोनों सरकारों से जवाब तलब किया है। यह याचिका पूर्व विधायक संयम लोढ़ा द्वारा अधिवक्ता राजेश शाह के माध्यम से संविधान के अनुच्छेद-226 के तहत दायर की गई थी।

याचिका में मुख्य रूप से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा स्वीकृत 'विकल्प-4' को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि सिरोही मास्टर प्लान-2031 के तहत प्रस्तावित 'विकल्प-5' तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित, किफायती और शहर के नियोजित विकास के लिए बेहतर है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 अगस्त 2026 की तारीख तय की है।

विकल्प-4 बनाम विकल्प-5: लागत और सुरक्षा का मुद्दा

याचिका में वर्तमान में स्वीकृत विकल्प-4 पर गंभीर चिंताएं जताई गई हैं। कहा गया है कि यह मार्ग घनी आबादी वाले आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जिससे भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, यह शहर के आर्थिक और सामाजिक ढांचे को भी प्रभावित कर सकता है। याचिका के अनुसार, विकल्प-4 के तहत बाईपास निर्माण की लागत लगभग 158 करोड़ रुपये है, जबकि विकल्प-5 के लिए यह लागत मात्र 83 करोड़ रुपये आंकी गई है।

पूरे प्रोजेक्ट की तुलना करें तो विकल्प-4 की अनुमानित लागत 303 करोड़ रुपये है, जबकि विकल्प-5 के जरिए इसे 249 करोड़ रुपये में पूरा किया जा सकता है। याचिकाकर्ता का दावा है कि विभागीय अधिकारियों और केंद्रीय मंत्री को इन तथ्यों से अवगत कराया गया था और स्वयं अधिकारियों की तुलनात्मक रिपोर्ट में भी विकल्प-5 को अधिक उपयुक्त माना गया था, फिर भी मंत्रालय ने विकल्प-4 पर काम शुरू कर दिया।

कानूनी आधार और मास्टर प्लान की बाध्यता

याचिका में सर्वोच्च न्यायालय के 'आर.के. मित्तल बनाम उत्तर प्रदेश सरकार' मामले के फैसले का हवाला दिया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि मास्टर प्लान केवल एक प्रशासनिक मार्गदर्शिका नहीं, बल्कि एक बाध्यकारी आधिकारिक दस्तावेज है। याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रशासन को विकास कार्यों में मास्टर प्लान की अनदेखी करने का अधिकार नहीं है।

इस जनहित याचिका में राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय की एलाइनमेंट अप्रूवल कमेटी, राजस्थान के पीडब्ल्यूडी अतिरिक्त मुख्य सचिव, सिरोही जिला कलक्टर, प्रोजेक्ट डायरेक्टर (नेशनल हाईवे), पाली पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता और सिरोही व रेवदर के उपखंड अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है।

अगली सुनवाई पर टिकी नजरें

अब 6 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। इस दिन केंद्र और राज्य सरकार को अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा। इस सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि सिरोही बाईपास परियोजना का भविष्य क्या होगा और क्या प्रशासन अपने वर्तमान एलाइनमेंट पर कायम रहेगा या मास्टर प्लान के अनुरूप बदलाव करेगा।

SponsoredMushfan Digital Studios - We Build Brands. We Grow Businesses.

टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

संबंधित खबरें