सिंगरौली: सड़क न होने से चारपाई पर शव ले जाने को मजबूर ग्रामीण, प्रशासन ने शुरू की जांच
सिंगरौली के जनपद पंचायत देवसर के महुआ गांव का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में ग्रामीण सड़क और आने-जाने की सुविधा नहीं होने के कारण एक शव को चारपाई पर रखकर ले जाते दिख रहे हैं।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से एक विचलित कर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए शव को चारपाई पर ढोकर ले जाना पड़ा। जनपद पंचायत देवसर के महुआ गांव का यह मामला शुक्रवार रात का है, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, महुआ गांव की निवासी देव मती साकेत काफी समय से बीमार थीं और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। दुर्भाग्यवश, इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। शुक्रवार रात करीब 10 बजे जब परिजन उनके पार्थिव शरीर को गांव लेकर लौटे, तो उन्हें भारी मुसीबत का सामना करना पड़ा। गांव तक पक्की सड़क न होने के कारण एंबुलेंस मुख्य मार्ग से आगे नहीं बढ़ सकी।
एम्बुलेंस चालक ने सड़क की खराब स्थिति और कीचड़ के कारण वाहन को आगे ले जाने से मना कर दिया। इसके बाद परिजनों के पास कोई विकल्प नहीं बचा और उन्होंने करीब 500 मीटर की दूरी तक शव को चारपाई पर रखकर पैदल ही घर तक पहुंचाया। अंधेरी रात में ग्रामीणों को शव ले जाते देख स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों की वर्षों पुरानी पीड़ा
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब उन्हें इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा है। पक्की सड़क के अभाव में गांव के लोग लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। विशेष रूप से बारिश के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब कच्चा रास्ता पूरी तरह से दलदल में बदल जाता है। इस दौरान बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाना या किसी की मृत्यु होने पर शव को मुख्य मार्ग तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
गांव के निवासियों ने बताया कि उन्होंने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन से सड़क निर्माण की गुहार लगाई है, लेकिन अब तक उनकी मांगों को अनसुना किया गया है। सड़क न होने से गांव की 100 से अधिक की आबादी प्रभावित है और उन्हें हर छोटे-बड़े काम के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती है।
प्रशासन का क्या है कहना?
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। मामले पर संज्ञान लेते हुए डिप्टी कलेक्टर धर्म प्रकाश मिश्रा ने बताया कि प्रशासन ने मौके पर एक टीम भेजी है ताकि जमीनी हकीकत का पता लगाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि गांव के रास्ते को लेकर एक पुराना विवाद चल रहा है, जो सड़क निर्माण में मुख्य बाधा बना हुआ है।
डिप्टी कलेक्टर के अनुसार, गांव के करीब 400 से 500 मीटर का हिस्सा निजी भूमि के अंतर्गत आता है। जमीन के मालिक इस हिस्से पर रास्ता देने के लिए तैयार नहीं हैं, जिसके कारण सड़क का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। प्रशासन अब इस विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत का रास्ता अपना रहा है ताकि ग्रामीणों को आवागमन की सुविधा मिल सके।
फिलहाल, प्रशासन ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि इस मामले में जल्द ही कोई ठोस समाधान निकाला जाएगा। लोग अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि क्या वाकई उन्हें इस समस्या से मुक्ति मिलेगी या फिर उन्हें भविष्य में भी इसी तरह की अमानवीय स्थितियों का सामना करना पड़ेगा।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!