सीधी: सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक के फेर में गई 13 साल की बच्ची की जान
अमिलिया बाजार में सर्पदंश के बाद समय पर इलाज नहीं मिलने से 13 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। सांप के डसने के बाद परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय करीब एक घंटे तक झाड़-फूंक कराते रहे।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में अंधविश्वास का एक दुखद मामला सामने आया है, जहां सर्पदंश का शिकार हुई एक 13 वर्षीय बच्ची की इलाज में देरी के कारण मौत हो गई। अमिलिया बाजार निवासी सुरेश कोल की बेटी रानी कोल के साथ यह हादसा शुक्रवार सुबह उस समय हुआ जब वह अपने घर से बाहर निकल रही थी। अचानक एक जहरीले सांप ने उसे डस लिया, जिसके बाद उसकी स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी।
अस्पताल के बजाय झाड़-फूंक में गंवाया कीमती समय
सांप के काटने के तुरंत बाद बच्ची के मुंह से झाग निकलने लगा और वह अचेत होने लगी। इस गंभीर स्थिति में भी परिजन उसे तुरंत चिकित्सा सहायता के लिए अस्पताल ले जाने के बजाय गांव में ही झाड़-फूंक कराने लगे। करीब एक घंटे तक चले इस अंधविश्वास के खेल में बच्ची का कीमती समय बर्बाद हो गया, जिससे जहर उसके पूरे शरीर में फैल गया।
जब बच्ची की हालत और अधिक नाजुक हो गई, तब परिजन उसे अमिलिया स्थित अस्पताल लेकर पहुंचे। हालांकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने बच्ची का उपचार शुरू करने का प्रयास किया, लेकिन शरीर में जहर के अत्यधिक प्रभाव के कारण उसे बचाया नहीं जा सका।
चिकित्सकों की चेतावनी: अंधविश्वास से बचें
इस मामले पर अस्पताल के डॉक्टर रिकेश शर्मा ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्पदंश के मामलों में 'गोल्डन ऑवर' का बहुत महत्व होता है। यदि बच्ची को समय पर अस्पताल लाया जाता, तो एंटी-वेनम इंजेक्शन के जरिए उसकी जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि सांप के काटने पर किसी भी प्रकार के अंधविश्वास या झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र का रुख करें।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी सर्पदंश जैसी घटनाओं को लेकर जागरूकता का अभाव है। रमेश गुप्ता नामक एक ग्रामीण ने बताया कि कई लोग आज भी आधुनिक चिकित्सा पद्धति के बजाय पारंपरिक झाड़-फूंक पर अधिक भरोसा करते हैं, जिसका परिणाम अक्सर जानलेवा साबित होता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी
यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सबक है। सर्पदंश के मामलों में अक्सर लोग घबराकर गलत कदम उठा लेते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सांप के काटने पर मरीज को शांत रखना चाहिए, प्रभावित अंग को स्थिर रखना चाहिए और बिना समय गंवाए उसे अस्पताल पहुंचाना चाहिए। झाड़-फूंक के चक्कर में मरीज का कीमती समय नष्ट होता है, जिससे बचने की सख्त आवश्यकता है।
फिलहाल, इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। बच्ची के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी समय-समय पर सर्पदंश के प्रति जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि जमीनी स्तर पर अभी भी काफी काम करने की जरूरत है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!