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श्योपुर: जवाहर नवोदय विद्यालय में छात्रों का 8 घंटे तक हंगामा, कलेक्टर से बात करने की मांग पर अड़े रहे

श्योपुर में जवाहर नवोदय विद्यालय में सोमवार को छात्रों ने जमकर हंगामा किया। हॉस्टल के 150 से अधिक छात्रों ने खुद को दूसरी मंजिल के एक हॉल में बंद कर लिया और केवल कलेक्टर से बात करने की मांग पर अड़े रहे।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

4 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
श्योपुर: जवाहर नवोदय विद्यालय में छात्रों का 8 घंटे तक हंगामा, कलेक्टर से बात करने की मांग पर अड़े रहे
मूल स्रोत

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में सोमवार को स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब करीब 150 छात्रों ने खुद को छात्रावास की दूसरी मंजिल के एक हॉल में बंद कर लिया। छात्र अपनी मांगों को लेकर करीब आठ घंटे तक अड़े रहे और केवल जिला कलेक्टर से ही बातचीत करने की जिद पर कायम रहे। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और स्कूल प्रबंधन में हड़कंप मच गया।

अनुशासनात्मक कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन

विवाद की जड़ दो दिन पहले हॉस्टल में मोबाइल फोन मिलने की घटना से जुड़ी है। इसके बाद शनिवार रात को हॉस्टल में बिजली गुल होने और तोड़फोड़ की शिकायतें सामने आई थीं। स्कूल प्रबंधन ने इस मामले में 10 से 12 छात्रों को चिह्नित कर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इसी संभावित कार्रवाई से बचने और प्रबंधन के रुख के विरोध में सोमवार दोपहर करीब 2 बजे छात्रों ने एकजुट होकर खुद को कमरे में बंद कर लिया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल, तहसीलदार और एसडीएम मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों को समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन छात्र अपनी बात पर अडिग रहे। स्थिति इतनी गंभीर थी कि तहसीलदार को सीढ़ी लगाकर दूसरी मंजिल की खिड़की तक पहुंचना पड़ा ताकि छात्रों से संवाद किया जा सके। छात्रों का आरोप था कि यदि वे बाहर आते हैं, तो स्कूल प्रबंधन उनके साथ मारपीट कर सकता है या उन्हें स्कूल से निकाला जा सकता है।

सुविधाओं और प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप

प्रदर्शनकारी छात्रों ने चेहरा ढंककर अपनी बात रखते हुए हॉस्टल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हॉस्टल में भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब है और साफ-सफाई का भी अभाव है। छात्रों का कहना था कि जब भी वे इन अव्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो प्रबंधन उनसे नाराज हो जाता है। उन्होंने दावा किया कि बिना किसी ठोस सबूत के उन्हें फंसाया जा रहा है और असली दोषियों की पहचान नहीं की जा रही है।

छात्रों में सबसे अधिक नाराजगी प्राचार्य की अनुपस्थिति को लेकर थी। उनका कहना था कि दिनभर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी उनसे मिलने आए, लेकिन प्राचार्य ने एक बार भी सामने आकर उनकी समस्याएं नहीं सुनीं। छात्रों ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक उन्हें लिखित आश्वासन नहीं मिलता और कलेक्टर से बात नहीं कराई जाती, तब तक वे बाहर नहीं आएंगे।

प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद मामला शांत

रात करीब 9 बजे जब एसडीएम के साथ प्राचार्य मौके पर पहुंचे, तब भी छात्रों ने अपनी मांग नहीं छोड़ी। अंततः, प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद रात 10 बजे छात्र कमरे से बाहर निकले। इस घटनाक्रम के कारण स्कूल परिसर में दिनभर भारी गहमागहमी बनी रही और पुलिस को सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़े।

फिलहाल, प्रशासन ने छात्रों को शांत करा दिया है, लेकिन स्कूल में व्याप्त असंतोष और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों ने एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है और छात्रों की शिकायतों का समाधान किस प्रकार किया जाता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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