शामली: बीमा क्लेम खारिज करना बैंक को पड़ा भारी, उपभोक्ता आयोग ने सुनाया मुआवजे का फैसला
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बैंक को मृतक के वारिसों को तीन लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। आयोग ने बैंक की सेवा में कमी मानी है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

बीमा क्लेम में लापरवाही पर बैंक को फटकार
उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के लिए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक कड़ा फैसला सुनाया है। बलवा गांव निवासी मोमीना ने अपने पति की मृत्यु के बाद बीमा राशि न मिलने पर बैंक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए बैंक की सेवा में स्पष्ट कमी पाई और उसे मृतक के वारिसों को तीन लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है।
आयोग ने केवल मुआवजे का आदेश ही नहीं दिया, बल्कि बैंक पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह जुर्माना राशि सरकारी खजाने में जमा की जाएगी। इसके अतिरिक्त, तीन लाख रुपये की मूल क्षतिपूर्ति राशि पर मृत्यु की तारीख से लेकर भुगतान के दिन तक नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी बैंक को देना होगा।
क्या था पूरा मामला
मृतक इकबाल का इंडियन बैंक की बलवा शाखा में प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खाता था। इस खाते के साथ व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा सुविधा भी जुड़ी हुई थी, जिसका प्रीमियम हर साल 177 रुपये का भुगतान करके नवीनीकृत किया जाता था। यह पॉलिसी 31 मार्च 2023 तक प्रभावी थी। दुर्भाग्यवश, 13 मार्च 2023 को मिस्त्री का काम करते समय करंट लगने से इकबाल की मृत्यु हो गई।
उनकी पत्नी मोमीना ने 8 मई 2023 को बीमा क्लेम के लिए आवश्यक दस्तावेज बैंक में जमा किए। आरोप है कि बैंक ने क्लेम प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय करीब एक साल तक उनसे अलग-अलग दस्तावेज मांगकर परेशान किया और अंततः क्लेम को खारिज कर दिया। इसके बाद मोमीना ने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
आयोग का कड़ा रुख और निर्देश
मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के चेयरमैन हेमंत कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में हुई। सुनवाई के दौरान बैंक और इंश्योरेंस कंपनी के प्रतिनिधियों का पक्ष सुना गया। आयोग ने पाया कि बैंक ने उपभोक्ता के साथ सेवा में लापरवाही बरती है, जिसके कारण पीड़ित परिवार को मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि बैंक को 45 दिनों के भीतर इस फैसले का पालन करना होगा। यदि बैंक निर्धारित समय सीमा के भीतर मुआवजे और जुर्माने की राशि का भुगतान नहीं करता है, तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत बैंक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ताओं के लिए संदेश
यह फैसला उन सभी खाताधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जो बैंक की बीमा योजनाओं का लाभ लेते हैं। अक्सर बैंक और बीमा कंपनियां छोटी-छोटी तकनीकी खामियों का हवाला देकर क्लेम खारिज कर देती हैं। हालांकि, उपभोक्ता आयोग के इस आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि बैंक की ओर से सेवा में कमी पाई जाती है, तो उपभोक्ता को न्याय मिलना तय है।
शामली के इस मामले ने बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और ग्राहकों के प्रति जवाबदेही की आवश्यकता को फिर से रेखांकित किया है। पीड़ित परिवार को अब इस फैसले से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि लंबे समय से वे अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!