सहरसा: सांसद मद की सड़क को मनरेगा में दिखाकर 13 लाख की हेराफेरी, ग्रामीणों ने की जांच की मांग
सहरसा के सलखुआ प्रखंड अंतर्गत मोबारकपुर पंचायत में सरकारी राशि के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने उप विकास आयुक्त (डीडीसी) से शिकायत की है कि सांसद मद से पहले बनी सड़क को मनरेगा की अलग-अलग योजनाओं में दिखाकर करीब 13 लाख रुपये की फर्जी निकासी की गई।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

बिहार के सहरसा जिले के सलखुआ प्रखंड अंतर्गत मोबारकपुर पंचायत में सरकारी धन के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने उप विकास आयुक्त (डीडीसी) को लिखित शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि सांसद मद से पूर्व में निर्मित सड़क को मनरेगा की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत दिखाकर करीब 13 लाख रुपये की अवैध निकासी की गई है। इस शिकायत के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और ग्रामीणों ने दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
पहले से बनी सड़क को बताया नया निर्माण
ग्रामीणों के अनुसार, पुरैनी वार्ड संख्या-2 में ठाकुर टोला से छठ पोखर घाट तक लगभग 500 फीट लंबी ईंट सोलिंग और पीसीसी सड़क का निर्माण खगड़िया के सांसद राजेश वर्मा की अनुशंसा पर पहले ही पूरा किया जा चुका था। इस निर्माण कार्य के लिए प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और अंचलाधिकारी (सीओ) द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र भी जारी किया गया था और इसका भुगतान भी पूर्व में ही हो चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि जो सड़क पहले से अस्तित्व में है, उसे ही कागजों में नया कार्य बताकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया है।
आरोप है कि इस सड़क को मनरेगा की तीन अलग-अलग योजनाओं के तहत दर्शाया गया है। इसमें योजना कोड 0521015/RC/20805270 के तहत ठाकुर टोला से मोबीन अली के खेत तक मिट्टी व सोलिंग कार्य, योजना कोड 0521015/RC/20805276 के तहत नसीर के खेत से उपेन्द्र ठाकुर के खेत तक कार्य और तीसरी योजना कोड 0521015007/RC/20805265 के तहत उपेन्द्र यादव के खेत से समीम उद्दीन के खेत तक कार्य दिखाया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि धरातल पर इन योजनाओं के नाम पर कोई भी नया काम नहीं हुआ है।
साक्ष्यों को मिटाने का आरोप
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि जैसे ही इस घोटाले की भनक लगी और शिकायत की प्रक्रिया शुरू हुई, आनन-फानन में पुराने ईंट सोलिंग को उखाड़ने का काम शुरू कर दिया गया ताकि सबूतों को मिटाया जा सके। मो. अब्दुल्लाह, मो. अनवर, मो. रुस्तम, मो. जर्रार आलम और मो. मोदस्सिर सहित अन्य ग्रामीणों ने डीडीसी से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने इसमें संलिप्त जनप्रतिनिधियों, सरकारी कर्मियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
इस पूरे मामले पर जब सलखुआ के पीओ समशुल जोहा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि रोजगार सेवक इस मामले को देखेंगे। वहीं, जब इस संबंध में रोजगार सेवक से सवाल किया गया, तो उन्होंने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। अधिकारियों की इस चुप्पी से ग्रामीणों में आक्रोश और भी बढ़ गया है।
प्रशासनिक स्तर पर जांच की उम्मीद
सरकारी योजनाओं में इस तरह की धांधली से स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। सांसद मद और मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की राशि का इस तरह से दुरुपयोग होना गंभीर चिंता का विषय है। अब ग्रामीणों की नजरें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होगी या फिर इसे फाइलों में दबा दिया जाएगा।
फिलहाल, ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आगे की रणनीति तय करेंगे। स्थानीय स्तर पर इस घोटाले की चर्चा जोरों पर है और लोग मांग कर रहे हैं कि सरकारी राशि की लूट करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!