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असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती: आरपीएससी ने हाईकोर्ट में दी सहमति, 50 फीसदी से अधिक पद वापस लेने का फैसला

हाईकोर्ट ने आरपीएससी को निर्देश दिए है कि वह विज्ञापित पदों के अतिरिक्त 50 फीसदी पदों तक ही चयन सूची बनाए। सुनवाई के दौरान आरपीएससी की ओर से भी कहा गया कि 50 फीसदी से ज्यादा बढाए गए पदों को वापस ले लिया जाएगा।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

5 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती: आरपीएससी ने हाईकोर्ट में दी सहमति, 50 फीसदी से अधिक पद वापस लेने का फैसला
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असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में पदों की संख्या पर हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश

राजस्थान में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती-2025 को लेकर चल रहे विवाद पर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान विज्ञापित पदों की संख्या में 50 फीसदी से अधिक की वृद्धि नहीं की जा सकती। इस आदेश के बाद आयोग ने भी अपनी सहमति जताते हुए कहा है कि वे निर्धारित सीमा से अधिक बढ़ाए गए पदों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।

यह मामला जस्टिस गणेशराम मीणा की एकलपीठ के समक्ष धर्मवीर मीणा व अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि भर्ती नियमों के अनुसार, किसी भी विज्ञापित भर्ती में पदों की संख्या में अधिकतम 50 प्रतिशत तक का ही इजाफा किया जा सकता है, जबकि आयोग ने कई विषयों में पदों की संख्या को दोगुना कर दिया था, जो नियमों का उल्लंघन है।

क्या था पूरा मामला और विवाद की जड़

आरपीएससी ने 18 सितंबर 2025 को असिस्टेंट प्रोफेसर के 24 विषयों में कुल 552 पदों के लिए आधिकारिक विज्ञापन जारी किया था। इसके बाद, 13 मई 2026 को आयोग ने इस भर्ती में संशोधन करते हुए पदों की संख्या बढ़ाकर 890 कर दी। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता गौरव शर्मा ने अदालत को बताया कि पदों की संख्या में की गई यह भारी बढ़ोतरी नियमों के दायरे से बाहर थी।

अधिवक्ता ने यह भी मुद्दा उठाया कि पदों की संख्या में संशोधन के बाद अभ्यर्थियों को दोबारा ऑनलाइन आवेदन करने का अवसर नहीं दिया गया। इस प्रक्रियात्मक खामी और पदों की संख्या में अनियंत्रित वृद्धि को लेकर अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में मांग की गई थी कि भर्ती प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप ही संचालित किया जाए।

आयोग का रुख और भविष्य की राह

सुनवाई के दौरान आरपीएससी के कानूनी प्रतिनिधियों ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। आयोग ने स्वीकार किया कि वे नियमों के तहत विज्ञापित पदों में केवल 50 फीसदी तक की ही वृद्धि कर सकते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि 50 फीसदी की सीमा से ऊपर बढ़ाए गए सभी अतिरिक्त पदों को वापस ले लिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद अदालत ने आयोग को चयन सूची तैयार करते समय इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा है।

इस निर्णय से उन हजारों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है जो लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया में स्पष्टता का इंतजार कर रहे थे। अब आरपीएससी को संशोधित पदों की संख्या के आधार पर ही चयन सूची तैयार करनी होगी। इससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आने की संभावना है और कानूनी अड़चनें भी कम होंगी।

भर्ती प्रक्रिया पर प्रभाव

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब आरपीएससी को अपनी आगामी कार्ययोजना में बदलाव करना होगा। आयोग को उन विषयों की सूची फिर से देखनी होगी जहां पदों की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ाई गई थी। इस कदम से भर्ती प्रक्रिया में देरी की आशंका तो है, लेकिन नियमों के पालन से भविष्य में होने वाली कानूनी चुनौतियों से बचा जा सकेगा।

वर्तमान में, अभ्यर्थी अब आयोग की अगली आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें पदों की वास्तविक संख्या और चयन प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। यह मामला सरकारी भर्तियों में नियमों के पालन और पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित करता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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