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रोहतक: 15 साल पुराने हत्याकांड में पूर्व विधायक बलवीर सिंह बाली को उम्रकैद

रोहतक ने कोर्ट ने दो बार विधायक रहे बलवीर सिंह उर्फ बाली पहलवान को मर्डर केस में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। बाली समेत 7 लोगों को एक दिन पहले ही कोर्ट ने दोषी ठहराया था।

मोहम्मद नवेद

मोहम्मद नवेद

एडिटर

27 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
रोहतक: 15 साल पुराने हत्याकांड में पूर्व विधायक बलवीर सिंह बाली को उम्रकैद
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15 साल पुराने मर्डर केस में कोर्ट का बड़ा फैसला

हरियाणा के रोहतक में एक बहुचर्चित हत्याकांड मामले में अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए पूर्व विधायक बलवीर सिंह उर्फ बाली पहलवान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला मई 2011 में कलानौर अनाज मंडी में हुए आढ़ती विष्णु निगाना की हत्या से जुड़ा है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कपिल राठी की अदालत ने इस मामले में बाली समेत कुल सात लोगों को दोषी करार दिया है।

अदालत ने बाली पहलवान के अलावा सुनील, पवन, सुनील उर्फ सोलर, राजेश, दिनेश उर्फ काला और मुकेश को भी दोषी माना है। वहीं, सबूतों के अभाव में आठ अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया है। सजा सुनाए जाने से पहले पूर्व विधायक ने अपनी खराब सेहत का हवाला देते हुए अदालत से नरमी बरतने की अपील की थी। उन्होंने खुद को हार्ट पेशेंट बताते हुए अपनी सर्जरी का जिक्र किया, लेकिन अदालत ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस न मानते हुए भी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी।

क्या था 2011 का पूरा विवाद

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 6 मई 2011 को कलानौर अनाज मंडी में दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस विवाद में निगाना निवासी विष्णु की गोली लगने से मौत हो गई थी। इस मामले में बसाना के तत्कालीन सरपंच सीताराम राठी की शिकायत पर पूर्व विधायक बलवीर सिंह बाली सहित 18 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। विवाद की मुख्य वजह प्रोटेक्शन मनी (रंगदारी) की मांग और मंडी में वर्चस्व को लेकर हुई कहासुनी बताई गई थी।

घटना के बाद बाली पहलवान की गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई थी। उस समय उनके समर्थकों ने उनके घर को चारों तरफ से घेर लिया था और कई दिनों तक पुलिस वहां प्रवेश नहीं कर पाई थी। स्थिति इतनी तनावपूर्ण थी कि ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया था। करीब तीन सप्ताह तक चले इस गतिरोध के बाद, 27 मई 2011 को बाली पहलवान ने भारी भीड़ के साथ अदालत में आत्मसमर्पण किया था।

राजनीतिक सफर और कानूनी लड़ाई

बलवीर सिंह बाली का राजनीतिक करियर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वे वर्ष 1996 में समता पार्टी और वर्ष 2000 में इनेलो के टिकट पर महम विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक चुने गए थे। इसके बाद भी उन्होंने राजनीति में सक्रिय रहने की कोशिश की और 2024 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा चुनाव भी लड़ा था, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

इस हत्याकांड के बाद बाली पहलवान को करीब सात साल तक जेल में रहने के बाद जमानत मिली थी। जमानत पर बाहर आने के बाद भी उन्होंने अपनी सक्रियता बनाए रखी थी, लेकिन अब अदालत के इस फैसले ने उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन पर बड़ा असर डाला है। कानूनी जानकारों के अनुसार, अदालत ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद ही यह कठोर निर्णय लिया है।

अदालत की सख्ती और आगे की राह

सजा सुनाए जाने के बाद अब दोषियों को जेल भेज दिया गया है। इस मामले में शिकायतकर्ता पक्ष के वकील तेजवीर अहलावत ने बताया कि अदालत ने कानून के दायरे में रहकर अपना फैसला सुनाया है। बचाव पक्ष के पास अब इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने का विकल्प मौजूद है। फिलहाल, रोहतक में इस फैसले की चर्चा जोरों पर है, क्योंकि यह मामला लंबे समय से स्थानीय राजनीति और अपराध जगत के केंद्र में रहा है।

इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून की प्रक्रिया भले ही लंबी हो, लेकिन न्याय मिलने में समय जरूर लगता है। 15 साल बाद आए इस निर्णय ने मृतक के परिजनों को न्याय की उम्मीद दी है, वहीं क्षेत्र में इस सजा को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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