रीवा: कल्पना मिश्रा मौत मामले में पिता का अनशन जारी, बिगड़ी तबीयत; प्रशासन ने शुरू की मजिस्ट्रियल जांच
रीवा में कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में उनके पिता का अनशन शुक्रवार को दसवें दिन भी जारी रहा। सिरमौर चौराहे पर धरने पर बैठे पिता की हालत और बिगड़ गई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

दसवें दिन भी जारी है पिता का संघर्ष
रीवा में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर उनके पिता का अनशन दसवें दिन भी जारी है। लगातार उपवास के कारण उनकी शारीरिक स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई है। सिरमौर चौराहे पर धरने पर बैठे पिता अब बैठने की स्थिति में भी नहीं हैं और उन्हें धरना स्थल पर लेटकर ही अपना विरोध जारी रखना पड़ रहा है।
शुक्रवार को प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम धरना स्थल पर पहुंची और उन्हें अनशन समाप्त करने के लिए मनाने का प्रयास किया। हालांकि, पिता ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी बेटी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जाती, तब तक वे किसी भी सूरत में अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि वे अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
मजिस्ट्रियल जांच और सुनवाई की प्रक्रिया
घटना की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। इस जांच का जिम्मा सिरमौर की एसडीएम दृष्टि जायसवाल को सौंपा गया है। प्रशासन ने जांच के लिए सात मुख्य बिंदु निर्धारित किए हैं और एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रशासनिक स्तर पर मामले की सुनवाई 12 सितंबर से 24 सितंबर के बीच आयोजित की जाएगी। सुनवाई का समय प्रत्येक गुरुवार और शनिवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक निर्धारित किया गया है, जो कलेक्टर कार्यालय में संपन्न होगी। प्रशासन ने आम जनता और प्रत्यक्षदर्शियों से अपील की है कि वे इस दौरान अपने साक्ष्य और लिखित बयान प्रस्तुत कर सकते हैं।
मामले की पृष्ठभूमि और एफआईआर की मांग
यह पूरा मामला 26 अगस्त का है, जब संजय गांधी अस्पताल में उपचार के दौरान कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मृत्यु हो गई थी। इस घटना के बाद से ही परिवार ने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित लोगों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग शुरू कर दी थी। पिता का आरोप है कि उनकी बेटी की मौत के पीछे स्पष्ट लापरवाही है, जिसके लिए दोषियों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय-सीमा के बाद प्राप्त होने वाले किसी भी साक्ष्य या जानकारी पर विचार नहीं किया जाएगा। हालांकि, मजिस्ट्रियल जांच की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद, पीड़ित पिता अपनी एफआईआर की मांग पर अडिग हैं। उनका कहना है कि प्रशासनिक जांच अपनी जगह है, लेकिन वे आपराधिक मामला दर्ज होने तक अपना अनशन जारी रखेंगे।
प्रशासन के सामने चुनौती
फिलहाल, प्रशासन के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। एक तरफ जहां मजिस्ट्रियल जांच के जरिए तथ्यों को जुटाने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ धरना स्थल पर बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति ने स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और पीड़ित परिवार को समझाने की कोशिशें जारी हैं।
आने वाले दिनों में होने वाली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेगी। स्थानीय लोग और विभिन्न संगठन भी इस मामले पर नजर रखे हुए हैं। फिलहाल, पूरा ध्यान इस बात पर है कि कैसे कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए और पीड़ित पिता की मांगों का समाधान निकाला जाए ताकि उनकी जान को और अधिक जोखिम न हो।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!