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रामपुर जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर मंडराया ध्वस्तीकरण का खतरा, सपा ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

रामपुर में समाजवादी अल्पसंख्यक सभा ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को ध्वस्त करने की प्रस्तावित कार्रवाई का विरोध किया। संगठन ने राज्यपाल के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर ध्वस्तीकरण पर तत्काल रोक लगाने और मामले का निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित करने की मांग की।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

27 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
रामपुर जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर मंडराया ध्वस्तीकरण का खतरा, सपा ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन
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जौहर विश्वविद्यालय के भवनों को लेकर बढ़ा विवाद

रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को गिराने की प्रस्तावित कार्रवाई के खिलाफ समाजवादी अल्पसंख्यक सभा ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने इस मामले में राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा है, जिसमें ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को तत्काल रोकने की मांग की गई है। इस विरोध प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी और अल्पसंख्यक सभा के सदस्य बड़ी संख्या में शामिल हुए।

समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष राम अवध यादव और अल्पसंख्यक सभा के जिलाध्यक्ष वाजिद अली के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की। ज्ञापन के माध्यम से यह तर्क दिया गया है कि विश्वविद्यालय के भवनों को ढहाने का निर्णय न केवल संस्थान के अस्तित्व के लिए खतरा है, बल्कि यह वहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हजारों छात्रों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है।

निर्माण की वैधता और आरडीए का अधिकार क्षेत्र

ज्ञापन में एक महत्वपूर्ण तकनीकी बिंदु उठाते हुए कहा गया है कि जिस समय इन 38 भवनों का निर्माण किया गया था, उस समय यह क्षेत्र रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। संगठन के अनुसार, संबंधित क्षेत्र को 27 सितंबर 2024 को आरडीए की सीमाओं के भीतर शामिल किया गया है। ऐसे में पुराने निर्माणों पर वर्तमान नियमों के आधार पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करना कानूनी रूप से अनुचित है।

सपा नेताओं का कहना है कि यदि भूमि या निर्माण से संबंधित कोई भी विवाद है, तो उसका समाधान कानून के दायरे में रहकर निष्पक्ष जांच के माध्यम से किया जाना चाहिए। सीधे तौर पर बुलडोजर चलाने या भवनों को ध्वस्त करने की कार्रवाई से शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और इससे जुड़े शिक्षकों व कर्मचारियों की आजीविका पर भी संकट खड़ा हो जाएगा।

राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान सपा जिलाध्यक्ष राम अवध यादव ने प्रदेश सरकार पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के साथ अलोकतांत्रिक व्यवहार कर रही है। यादव ने दावा किया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को पहले फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल भेजा गया और अब उनके द्वारा स्थापित शैक्षणिक संस्थान को नष्ट करने की साजिश रची जा रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जौहर विश्वविद्यालय किसी एक समुदाय का नहीं, बल्कि सभी धर्मों और वर्गों के छात्रों के लिए एक प्रमुख शिक्षा केंद्र है। सरकार के इस कदम को उन्होंने शिक्षा के प्रति दुर्भावनापूर्ण दृष्टिकोण करार दिया है। सपा नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस मामले में कोई एकतरफा कार्रवाई की, तो पार्टी इसके खिलाफ व्यापक आंदोलन करेगी।

आगे की स्थिति और प्रशासनिक रुख

फिलहाल, जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर समाजवादी अल्पसंख्यक सभा ने अपनी बात मजबूती से रखी है। अब देखना यह है कि राज्यपाल कार्यालय और जिला प्रशासन इस ज्ञापन पर क्या संज्ञान लेता है। विश्वविद्यालय प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के बीच का यह विवाद अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर उलझता जा रहा है, जिससे छात्रों में भी चिंता की स्थिति बनी हुई है।

विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार के बीच चल रहे इस गतिरोध के कारण भविष्य में कानूनी लड़ाई और तेज होने के आसार हैं। फिलहाल, ध्वस्तीकरण की प्रस्तावित कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग को लेकर सपा ने अपना दबाव बनाए रखा है, ताकि संस्थान की संपत्तियों को सुरक्षित रखा जा सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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