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राजस्थान पुलिस का छह महीने का रिपोर्ट कार्ड: गंभीर अपराधों में गिरावट, ड्रग माफियाओं की संपत्ति होगी कुर्क

गंभीर अपराधों में 4.65 प्रतिशत की कमी, पेपर लीक माफिया पर प्रभावी रोक, नशा तस्करों और संगठित अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई तथा नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए पुलिस ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत किया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

6 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
राजस्थान पुलिस का छह महीने का रिपोर्ट कार्ड: गंभीर अपराधों में गिरावट, ड्रग माफियाओं की संपत्ति होगी कुर्क
मूल स्रोत

गंभीर अपराधों में 4.65 प्रतिशत की कमी

राजस्थान पुलिस ने बीते छह महीनों का अपना रिपोर्ट कार्ड जारी किया है, जिसमें कानून-व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण सुधार के दावे किए गए हैं। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वर्ष 2025 की पहली छमाही की तुलना में 2026 की समान अवधि में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत दर्ज कुल अपराधों में 4.65 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले वर्ष जहां 99,272 मामले दर्ज हुए थे, वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा घटकर 94,652 रह गया है।

पुलिस की सक्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि विशेष अधिनियमों के तहत दर्ज मामलों में 4.25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हत्या, लूट, अपहरण और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, हत्या के मामलों में 4.41 प्रतिशत, लूट में 19.93 प्रतिशत और दुष्कर्म के मामलों में 13.36 प्रतिशत की कमी आई है। इसके अलावा, पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज होने वाले मामलों में भी 20.90 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है।

नशा तस्करों और गैंगस्टर्स पर सख्त प्रहार

डीजीपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस अब केवल अपराध के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने बड़े ड्रग सिंडिकेट्स के खिलाफ अभियान चलाया है। नशा तस्करों द्वारा अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को ध्वस्त करने का सिलसिला जारी है, जिसमें पिछले डेढ़ वर्षों में करोड़ों रुपये की संपत्ति पर कार्रवाई की गई है।

आगामी समय में सीआईडी (सीबी) और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के माध्यम से बड़े तस्करों की संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। इसके लिए बीएनएसएस और पीआईटी-एनडीपीएस कानून का सहारा लिया जाएगा। वहीं, रंगदारी के लिए फायरिंग करने वाले गैंगस्टर्स के खिलाफ एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) का अभियान जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर विदेश में छिपे अपराधियों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।

महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुलिस ने अनुसंधान के समय में भी बड़ी कटौती की है। पॉक्सो मामलों में औसत जांच समय 78 दिन से घटकर 51 दिन और दुष्कर्म के मामलों में 81 दिन से घटकर 52 दिन रह गया है। कालिका पेट्रोल यूनिट और एंटी रोमियो स्क्वॉड जैसे अभियानों के जरिए महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

साइबर अपराधों पर तकनीक का पहरा

साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) की स्थापना प्रक्रियाधीन है। साइबर हेल्पलाइन 1930 पर अब 53 लाइनें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं। डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए करोड़ों रुपये की राशि होल्ड करवाई है। सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से हजारों मोबाइल ट्रेस कर उनके मालिकों को लौटाए गए हैं।

तकनीकी संवर्ग में सुधार के लिए भी कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार चालक, घुड़सवार और बैंड शाखा सहित तकनीकी संवर्ग के 403 पदों का पुनर्गठन किया गया है, जिससे इन विभागों में भी पदोन्नति के नए रास्ते खुल गए हैं। एटीएस ने भी कट्टरपंथी विचारधारा के खिलाफ और अवैध हथियारों की तस्करी रोकने में महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज की हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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