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राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं का कायाकल्प: 24 हजार अस्पतालों में चरणबद्ध तरीके से लागू होगा पीपीपी मॉडल

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

8 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं का कायाकल्प: 24 हजार अस्पतालों में चरणबद्ध तरीके से लागू होगा पीपीपी मॉडल
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स्वास्थ्य सेवाओं में निजी भागीदारी की तैयारी

राजस्थान सरकार राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए एक नई दिशा में कदम बढ़ा रही है। हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव रोहित कुमार की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य के लगभग 24 हजार अस्पतालों में आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं आम जनता तक पहुंचाना है।

बैठक के दौरान राजस्थान की प्रमुख स्वास्थ्य सचिव ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पीपीपी मॉडल के विभिन्न विकल्पों का गहन अध्ययन करेगी। इस मॉडल को लागू करने से पहले यह परीक्षण किया जाएगा कि प्रदेश के किन क्षेत्रों में इसे सबसे पहले शुरू करना अधिक प्रभावी होगा। सरकार का लक्ष्य निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और निवेश का उपयोग करके स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना है।

विभिन्न क्षेत्रों में निजी निवेश की संभावनाएं

प्रस्तुतीकरण के दौरान यह रेखांकित किया गया कि पीपीपी मॉडल के माध्यम से राज्य में मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी जांच सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा, डायलिसिस सेंटर, कार्डियक केयर सुविधाएं, टेलीमेडिसिन और मेडिकल ट्रांसपोर्टेशन जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी से आम लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को भी इस मॉडल के दायरे में लाने की योजना है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और प्रभावशीलता को बढ़ाया जा सके।

केंद्र सरकार के प्रतिनिधि एएस विजनहेरा ने इस दौरान देश के अन्य राज्यों में सफलतापूर्वक संचालित पीपीपी मॉडलों का विवरण साझा किया। बैठक में केंद्र सरकार की वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) और आईआईपीडीएफ योजनाओं के बारे में भी विस्तार से चर्चा की गई। इन योजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य क्षेत्र की पीपीपी परियोजनाओं को आवश्यक वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे परियोजनाओं का क्रियान्वयन सुगम हो सकेगा।

अन्य राज्यों के अनुभवों से मिलेगी सीख

बैठक में यह जानकारी दी गई कि उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक और ओडिशा जैसे राज्यों में पहले से ही पीपीपी मॉडल के तहत स्वास्थ्य सेवाएं संचालित की जा रही हैं। इन राज्यों में स्थापित मेडिकल कॉलेजों, आधुनिक डायग्नोस्टिक सेंटरों और ग्रीनफील्ड अस्पतालों के सफल अनुभवों को राजस्थान के लिए एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। इन मॉडलों के सफल क्रियान्वयन से मिली सीख को राजस्थान की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार ढालने का प्रयास किया जाएगा।

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में राजस्थान की ओर से मुख्य सचिव गायत्री राठौड़, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल और चिकित्सा शिक्षा उप निदेशक डॉ. वंदना शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य में स्वास्थ्य अवसंरचना के विकास के लिए निजी निवेश को आकर्षित करना एक दूरगामी कदम साबित होगा।

भविष्य की राह और चुनौतियां

आने वाले समय में राज्य सरकार इस मॉडल के क्रियान्वयन के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेगी। इसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निजी भागीदारी से स्वास्थ्य सेवाओं की लागत आम जनता के लिए किफायती बनी रहे और सेवाओं की गुणवत्ता में कोई समझौता न हो। चरणबद्ध तरीके से लागू होने वाली इस योजना के तहत पहले चरण में चिन्हित अस्पतालों का चयन किया जाएगा, जहां बुनियादी ढांचे और विशेषज्ञ सेवाओं की सबसे अधिक आवश्यकता है।

राजस्थान सरकार का यह कदम राज्य के स्वास्थ्य तंत्र में एक बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है। यदि यह मॉडल सफलतापूर्वक लागू होता है, तो प्रदेश के दूरदराज के इलाकों में भी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी, जिससे राज्य के स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार की उम्मीद है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है और निजी क्षेत्र की इसमें कितनी सक्रिय भागीदारी रहती है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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