दिल्ली में राहुल गांधी का बड़ा हमला: कहा- सरकार लोगों की आवाज दबाने की कर रही कोशिश
कांग्रेस का ‘रचनात्मक कांग्रेस प्रकोष्ठ’ का दो दिवसीय (12-13 अगस्त) राष्ट्रीय अधिवेशन दिल्ली के इंदिरा भवन में हो रहा है। कार्यक्रम के दूसरे दिन गुरुवार को अधिवेशन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी शामिल हुए।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

नई दिल्ली में आयोजित कांग्रेस के 'रचनात्मक कांग्रेस प्रकोष्ठ' के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखे प्रहार किए। इंदिरा भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार देश के नागरिकों को अपनी बात रखने और अभिव्यक्ति की आजादी का उपयोग करने से रोकने का प्रयास कर रही है।
जनता की आवाज दबाने का आरोप
राहुल गांधी ने जंतर-मंतर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिए एकत्रित हुए छात्रों को सरकार ने अपनी बात रखने से रोका। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य भारत के हर नागरिक को अपनी बात कहने का अवसर प्रदान करना है, जबकि सरकार एक ऐसी व्यवस्था थोपना चाहती है जो जनता की आवाज को दबा दे। उन्होंने विश्वास जताया कि अब देश की जनता चुप रहने वाली नहीं है।
विपक्ष के नेता ने दावा किया कि सरकार उनकी सक्रियता से परेशान है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब नींद नहीं आती। राहुल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय उन्हें चाणक्य और सरदार पटेल जैसे नामों से संबोधित किया जाता था, लेकिन आज उन्हें भारत की मुखर आवाज और जन-अभिव्यक्ति का सामना करना पड़ रहा है।
विचारधारा की लड़ाई और आरएसएस पर टिप्पणी
राहुल गांधी ने देश में व्याप्त डर के माहौल पर चिंता जताते हुए कहा कि आज बहुत से लोग कायरतापूर्ण व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि ब्रिटिश शासन के दौरान डर महसूस होता था तो वह स्वाभाविक था, लेकिन आज का मुकाबला उन लोगों से है जिन्हें देश के इतिहास और दर्शन की गहरी समझ नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि भविष्य में कभी आरएसएस की अभिव्यक्ति को खत्म करने की कोशिश हुई, तो वह उसकी रक्षा के लिए भी खड़े होंगे।
अधिवेशन के दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि देश की शिक्षा प्रणाली वर्तमान में संकट में है और हर सरकार को छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा ढांचे में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता है।
अधिवेशन का उद्देश्य और व्यापक चर्चा
12 अगस्त को शुरू हुए इस दो दिवसीय अधिवेशन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी उपस्थित रहे। इस मंच पर सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, कलाकारों, समुदाय के प्रतिनिधियों और नागरिक समाज के प्रबुद्ध लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य देश के ज्वलंत मुद्दों पर एक साझा मंच तैयार करना था।
अधिवेशन के पहले दिन अर्थव्यवस्था, बढ़ती बेरोजगारी, गरीबी और सामाजिक असमानता जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अलावा पर्यावरण, प्रदूषण, विस्थापन, स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और न्याय प्रणाली के अधिकारों पर भी मंथन किया गया। कांग्रेस ने इन मुद्दों को उठाकर सरकार की नीतियों के खिलाफ एक वैचारिक मोर्चा खोलने की रणनीति पर काम किया है।
यह आयोजन कांग्रेस के उस प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत पार्टी जमीनी स्तर पर काम करने वाले संगठनों और बुद्धिजीवियों को एक साथ लाकर सरकार की नीतियों के खिलाफ जनमत तैयार करना चाहती है। राहुल गांधी के बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में विपक्ष अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाए रखने की तैयारी में है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!