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प्रयागराज पुलिस में बड़ा फेरबदल: एसओजी की चारों टीमें भंग, 45 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

पुलिस कमिश्नर पीयूष मोरदिया ने प्रयागराज कमिश्नरेट की सेंट्रल एसओजी समेत नगर, गंगानगर और यमुनानगर जोन की एसओजी टीमें भंग कर दी हैं। तीन सितंबर को जारी आदेश में इन टीमों में तैनात पुलिसकर्मियों को अपने-अपने पुलिस उपायुक्त को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

4 सितंबर 20262 मिनट पढ़ें
प्रयागराज पुलिस में बड़ा फेरबदल: एसओजी की चारों टीमें भंग, 45 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
मूल स्रोत

प्रयागराज कमिश्नरेट का कड़ा एक्शन

प्रयागराज में पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया ने कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। कमिश्नरेट की चारों एसओजी (स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप) टीमों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। इस कार्रवाई के तहत कुल 45 दरोगा और सिपाहियों को एसओजी से हटाकर उनके संबंधित पुलिस उपायुक्तों (DCP) के पास रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है।

यह निर्णय इन टीमों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे लगातार सवालों और गंभीर शिकायतों के बाद लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, इन पुलिसकर्मियों पर न केवल अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने के आरोप हैं, बल्कि अपराधियों के साथ मिलीभगत और साठगांठ की भी शिकायतें उच्च अधिकारियों तक पहुंची थीं।

लंबे समय से जमे थे पुलिसकर्मी

जांच में यह बात सामने आई है कि एसओजी में तैनात कई पुलिसकर्मी पिछले 10 से 12 वर्षों से प्रयागराज में ही जमे हुए थे। नियमों के अनुसार तबादले होने के बावजूद, इनमें से कई ने कार्यमुक्त होने में आनाकानी की थी। कुछ ऐसे पुलिसकर्मी भी इन टीमों का हिस्सा थे जिन्हें पूर्व में भी शिकायतों के आधार पर हटाया गया था, लेकिन बाद में वे फिर से एसओजी में जगह बनाने में कामयाब रहे।

इन पुलिसकर्मियों की कार्यशैली पर सवाल तब और गहरा गए जब शहर में हुई कई सनसनीखेज आपराधिक घटनाओं का खुलासा करने में एसओजी विफल रही। कीडगंज में तीर्थ पुरोहित की हत्या, करेली में प्रॉपर्टी डीलर की हत्या और एक सेवानिवृत्त सीआईडी इंस्पेक्टर के घर में हुई हत्या जैसी वारदातों के आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर रहे या उन्होंने खुद अदालत में सरेंडर कर दिया।

अपराधियों से साठगांठ और अवैध संपत्ति के आरोप

एसओजी के कुछ सदस्यों पर माफिया अतीक अहमद के करीबी गुर्गों के साथ संपर्क रखने के गंभीर आरोप हैं। बताया जा रहा है कि सिविल लाइंस स्थित एक होटल में इन पुलिसकर्मियों का नियमित आना-जाना था, जिसका संबंध आपराधिक गतिविधियों से रहा है। इसके अलावा, इन पुलिसकर्मियों द्वारा अपने परिजनों के नाम पर भारी मात्रा में जमीनें खरीदने की भी चर्चा है, जिसकी जांच की जा रही है।

इन पुलिसकर्मियों के निजी वाहनों पर ब्लैक फिल्म लगाकर घूमने और रसूख दिखाने की शिकायतें भी आम थीं। अब जब पूरी टीम को भंग कर दिया गया है, तो विभाग के भीतर इन संपत्तियों और संदिग्ध संपर्कों की गहन जांच की संभावना बढ़ गई है।

आगे की कार्रवाई

फिलहाल, हटाए गए सभी 45 पुलिसकर्मियों को संबंधित जोन के डीसीपी कार्यालय में अटैच किया गया है। पुलिस प्रशासन अब इन सभी के पिछले रिकॉर्ड और कार्यप्रणाली की समीक्षा कर रहा है। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई के बाद पुलिस कमिश्नरेट में नई और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की तैयारी है ताकि अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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