प्रयागराज: जन शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पर 18 अफसरों पर गिरी गाज, डीएम ने की सख्त कार्रवाई
प्रयागराज में जनसुनवाई और शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने पर जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने 18 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। यह कार्रवाई शिकायतों के सतही निस्तारण के मामले में की गई है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

कागजी निस्तारण पर डीएम का कड़ा रुख
प्रयागराज में जनसुनवाई और आम जनता की शिकायतों के समाधान को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने और उन्हें केवल कागजों तक सीमित रखने वाले 18 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। यह कदम तहसील सदर में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान सामने आई अनियमितताओं के बाद उठाया गया है।
जिलाधिकारी ने इस बार एक नई पहल करते हुए पूर्व में निस्तारित किए गए प्रकरणों का औचक सत्यापन कराया। इसके लिए 17 जिला स्तरीय अधिकारियों की एक टीम गठित की गई, जिसने रैंडम आधार पर 51 मामलों की गहन जांच की। इस क्रॉस-चेकिंग प्रक्रिया में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कई मामलों में शिकायतकर्ताओं की संतुष्टि का स्तर बेहद निराशाजनक था।
जमीनी हकीकत और अधिकारियों की लापरवाही
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित विभागों के अधिकारियों ने शिकायतों का निस्तारण केवल फाइलों में ही किया था, जबकि जमीनी स्तर पर समस्या जस की तस बनी हुई थी। 51 में से 22 प्रकरणों में शिकायतकर्ताओं ने असंतोष जाहिर किया, जिससे यह साबित हो गया कि अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन सही ढंग से नहीं किया और सतही रिपोर्ट पेश की।
इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई के निर्देश दिए। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की गई है, उनमें नगर निगम के अवर अभियंता सीपी पाण्डेय, कर अधीक्षक सतीश चन्द्र, उप निरीक्षक सौम्यापुंज पाण्डेय, जेई दीपक कुमार, लेखपाल मनीष कुमार, राजस्व निरीक्षक ओम प्रकाश यादव, जेई विनोद कुमार और लेखपाल प्रियंका पालीवाल शामिल हैं।
नोटिस और चेतावनी का दौर
प्रतिकूल प्रविष्टि के अलावा, प्रशासन ने अन्य लापरवाह कर्मियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। इनमें राजस्व विभाग की एमजे हर्षिता वर्मा, कर अधीक्षक झम्मन सिंह, बमरौली विद्युत खंड के अधिशासी अभियंता, लेखपाल सुधीर कुमार और कर अधीक्षक जया सिंह को शामिल किया गया है। इन सभी को अपने स्पष्टीकरण में यह बताना होगा कि क्यों न उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही, राजस्व निरीक्षक चंद्रशेखर आजाद, कर अधीक्षक ट्रांसपोर्ट नगर, टैगोर टाउन के उप खंड अधिकारी, कैंट थाना के एसआई मनीष कुमार उपाध्याय और नगर निगम के अवर अभियंता विद्युत अविनाश उमार को भविष्य के लिए चेतावनी दी गई है। इन सभी को हिदायत दी गई है कि वे भविष्य में जन शिकायतों के प्रति संवेदनशील रहें और समयबद्ध तरीके से गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करें।
प्रशासनिक महकमे में हड़कंप
जिलाधिकारी की इस औचक कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच इस बात का संदेश गया है कि अब जनसुनवाई के नाम पर खानापूर्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इस तरह की सख्ती से न केवल शिकायतों का वास्तविक समाधान होगा, बल्कि जनता का सरकारी तंत्र पर भरोसा भी बढ़ेगा।
आगामी दिनों में भी इसी प्रकार के सत्यापन कार्य जारी रहने की संभावना है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जन शिकायतों का निस्तारण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की कोताही बरतने वाले अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। यह कार्रवाई अन्य विभागों के लिए भी एक कड़ा सबक है जो शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेते।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!