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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: खरीफ 2026 के लिए पंजीकरण शुरू, 31 जुलाई तक उठाएं लाभ

राज्य सरकार ने किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और प्रतिकूल मौसम से होने वाले फसल नुकसान से आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को खरीफ 2026 और रबी 2026-27 सीजन के लिए लागू कर दिया है। हनुमानगढ़ जिले में इस योजना के संचालन की जिम्मेदारी ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को सौंपी गई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

28 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: खरीफ 2026 के लिए पंजीकरण शुरू, 31 जुलाई तक उठाएं लाभ
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हनुमानगढ़ में खरीफ फसलों के लिए बीमा प्रक्रिया शुरू

राज्य सरकार ने किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और प्रतिकूल मौसम के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को खरीफ 2026 और रबी 2026-27 सीजन के लिए अधिसूचित कर दिया है। हनुमानगढ़ जिले में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को सौंपी गई है। कृषि विभाग के अनुसार, यह योजना किसानों को एक सुरक्षा कवच प्रदान करती है ताकि वे फसल खराब होने की स्थिति में भी आर्थिक रूप से सुरक्षित रह सकें।

यह योजना पूरी तरह से स्वैच्छिक आधार पर संचालित है। इसमें ऋणी, गैर-ऋणी और पात्र बंटाईदार किसान अपनी सुविधानुसार शामिल हो सकते हैं। जो ऋणी किसान इस योजना का लाभ नहीं लेना चाहते हैं, उन्हें संबंधित बैंक में जाकर अपना घोषणा-पत्र जमा करना होगा। वहीं, गैर-ऋणी किसान खरीफ सीजन के लिए 31 जुलाई तक और रबी सीजन के लिए 31 दिसंबर तक अपना बीमा करवा सकते हैं। बीमा प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए इसे बैंक, डाकघर, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी), अधिकृत बीमा एजेंट और राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल के साथ जोड़ा गया है।

25 फसलों को मिलेगा सुरक्षा कवच

इस बार योजना के तहत कुल 25 फसलों को बीमा सुरक्षा के दायरे में रखा गया है। खरीफ सीजन के लिए बाजरा, ज्वार, मक्का, मूंग, मोठ, ग्वार, उड़द, अरहर, सोयाबीन, तिल, धान, कपास और मूंगफली समेत 14 फसलों को अधिसूचित किया गया है। रबी सीजन के लिए गेहूं, जौ, चना, सरसों, तारामीरा, जीरा, धनिया, ईसबगोल, मेथी, रबी मक्का और मसूर जैसी 11 फसलों को शामिल किया गया है। इन फसलों का बीमा तहसील और पटवार मंडल स्तर पर निर्धारित इकाइयों के आधार पर किया जाएगा।

बीमा सुरक्षा में सूखा, कम वर्षा, लंबी शुष्क अवधि, बाढ़, जलभराव, कीट प्रकोप, भूस्खलन, बिजली गिरने से आग, तूफान और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, फसल कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी गई उपज को भी चक्रवाती वर्षा या असामयिक बारिश से होने वाले नुकसान पर 14 दिनों तक व्यक्तिगत आधार पर सुरक्षा प्रदान की जाएगी।

नुकसान होने पर मुआवजे की प्रक्रिया

फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को त्वरित सूचना देना अनिवार्य है। नुकसान के 72 घंटे के भीतर किसान को संबंधित पोर्टल, हेल्पलाइन नंबर, क्रॉप इंश्योरेंस ऐप या अपने बैंक अथवा कृषि विभाग को सूचित करना होगा। यदि खरीफ सीजन में कम वर्षा के कारण 75 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में बुवाई नहीं हो पाती है, तो पात्र किसानों को बीमित राशि का 25 प्रतिशत तक मुआवजा अग्रिम के रूप में दिया जा सकता है।

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस बार तकनीक आधारित उपज आकलन पर विशेष जोर दिया गया है। बीमा दावे स्वीकृत होने के बाद राशि का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से किया जाएगा। विभाग ने सभी किसानों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते अपने दस्तावेज जमा कराएं और बीमा प्रक्रिया पूरी करें ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा से बचा जा सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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