पटना में डेंगू का प्रकोप: संक्रमितों की संख्या 156 के पार, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
पटना में डेंगू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले 24 घंटे में डेंगू के 4 नए मरीज सामने आए हैं, जिससे इस सीजन में कुल संक्रमितों की संख्या 156 तक पहुंच गई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

पटना में डेंगू के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। पिछले 24 घंटों के भीतर संक्रमण के 4 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद इस सीजन में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 156 तक पहुंच गई है। शहर में रुक-रुक कर हो रही बारिश और जगह-जगह जलजमाव के कारण मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं।
अस्पतालों में बढ़ रही मरीजों की संख्या
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल 156 मरीजों में से 76 का इलाज सरकारी अस्पतालों में चल रहा है। वहीं, 62 मरीजों की पुष्टि निजी अस्पतालों में हुई है, जबकि 18 मरीजों में संक्रमण की पहचान विभिन्न जांच लैब के माध्यम से की गई है। जुलाई महीने से ही पटना में डेंगू के मामलों में धीरे-धीरे वृद्धि देखी जा रही थी, जो अब रफ्तार पकड़ चुकी है।
सिविल सर्जन कार्यालय ने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को बुखार के संदिग्ध मरीजों की जांच पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया है। अस्पतालों को यह भी निर्देशित किया गया है कि डेंगू की पुष्टि होने पर मरीज का विवरण तत्काल संबंधित पोर्टल पर अपलोड किया जाए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में फॉगिंग और एंटी-लार्वा छिड़काव जैसी मच्छर नियंत्रण की कार्रवाई समय पर की जा सके।
संक्रमण के मुख्य कारण और बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि डेंगू फैलने का सबसे बड़ा कारण घरों के आसपास जमा साफ पानी है। कूलर, गमले, पानी की टंकियां, पुराने टायर और खाली प्लॉट में जमा पानी एडीज एजिप्टी मच्छर के लिए प्रजनन का मुख्य केंद्र बन रहे हैं। यह मच्छर मुख्य रूप से दिन के समय सक्रिय रहता है, इसलिए दिन में भी मच्छरों से बचाव के उपाय करना अनिवार्य है।
चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि एक बार डेंगू होने के बाद व्यक्ति पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता। डेंगू वायरस के चार अलग-अलग सीरोटाइप होते हैं, और दोबारा संक्रमण होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे में डेंगू शॉक सिंड्रोम या हेमोरेजिक फीवर का खतरा बना रहता है। इसलिए, जिन लोगों को पहले डेंगू हो चुका है, उन्हें भी इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
लक्षणों को नजरअंदाज न करें
डेंगू के लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों में तेज दर्द, उल्टी और त्वचा पर लाल चकत्ते शामिल हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि ऐसे लक्षण महसूस होने पर खुद से दवा लेने के बजाय तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच और सही उपचार ही इस बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे अपने घरों के आसपास पानी जमा न होने दें। नगर निगम की टीमें जलजमाव वाले इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं, लेकिन विशेषज्ञों का जोर इस बात पर है कि डेंगू की रोकथाम सरकारी प्रयासों के साथ-साथ जन-भागीदारी से ही संभव है। घर के अंदर और बाहर सफाई रखना ही संक्रमण की चेन को तोड़ने का एकमात्र उपाय है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!