पानीपत: नाबालिग खिलाड़ी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी बैडमिंटन कोच बरी, 3 साल जेल में बिताने के बाद मिली राहत
पानीपत की फास्ट ट्रैक (पॉक्सो) अदालत ने नाबालिग बैडमिंटन खिलाड़ी को आत्महत्या के लिए उकसाने और यौन शोषण के आरोपी कोच अमित मलिक को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों में पाई गई गंभीर विसंगतियों के आधार पर यह फैसला सुनाया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

हरियाणा के पानीपत में एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसले के तहत, स्थानीय फास्ट ट्रैक पॉक्सो अदालत ने बैडमिंटन कोच अमित मलिक को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अमित मलिक पर एक नाबालिग खिलाड़ी को आत्महत्या के लिए उकसाने और यौन शोषण के गंभीर आरोप लगे थे। इस मामले में कोच को तीन साल से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में जेल में बिताना पड़ा था। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और गवाहों के बयानों में पाई गई विसंगतियों के चलते यह फैसला सुनाया है।
क्या था पूरा मामला?
मामले की शुरुआत 21 मई 2023 को हुई थी, जब पानीपत में 11वीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा ने अपने घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के तुरंत बाद मृतका के पिता ने किसी पर संदेह नहीं जताया था, जिसके चलते पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई धारा 174 के तहत की थी। हालांकि, अगले ही दिन पिता ने कोच अमित मलिक पर मानसिक दबाव बनाने का आरोप लगाया। इसके बाद पुलिस ने मृतका की बड़ी बहन के बयानों के आधार पर पॉक्सो एक्ट और आईपीसी की धारा 305 व 376 जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया था।
अदालत में बचाव पक्ष के वकील तरुण शर्मा ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को गलत तरीके से फंसाया गया था। इस मामले में कोच ने 3 साल और 8 दिन का समय जेल में बिताया। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा है।
अदालत ने क्यों माना साक्ष्यों को कमजोर?
फैसले के दौरान अदालत ने पुलिस जांच पर कई गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने पाया कि जांच के दौरान मृतका की बहन ने एक अन्य लड़के 'वीर' का नाम भी लिया था, जो मृतका को परेशान करता था, लेकिन पुलिस ने उस दिशा में कोई जांच नहीं की। इसके अलावा, घर, बैडमिंटन अकादमी और होटलों के सीसीटीवी फुटेज में भी आरोपी के खिलाफ कोई आपत्तिजनक साक्ष्य नहीं मिला।
मुख्य गवाह यानी मृतका की बहन के बयानों में भी विरोधाभास पाया गया। उसने स्वीकार किया कि उसने कभी कोच को अपनी बहन के साथ गलत हरकत करते नहीं देखा। साथ ही, टूर्नामेंट के दौरान कोच के साथ उनका परिवार और ड्राइवर भी मौजूद रहते थे, जिन्होंने किसी भी संदिग्ध गतिविधि की पुष्टि नहीं की। घटना के बाद मृतका की बहन का आरोपी के साथ सामान्य व्यवहार भी अदालत की नजर में एक महत्वपूर्ण बिंदु रहा।
चिकित्सकीय जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी जबरन यौन शोषण की पुष्टि नहीं हो सकी। वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के विश्लेषण के बाद, अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं।
न्यायिक निर्णय का निष्कर्ष
अदालत ने माना कि घटना के समय मृतका नाबालिग थी, लेकिन आरोपी अमित मलिक के खिलाफ यौन शोषण या आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई भी कानूनी साक्ष्य सिद्ध नहीं हो सका। इन आधारों पर, अदालत ने अमित मलिक को आईपीसी की धारा 305, 376(3), 376(2)(n) और पॉक्सो एक्ट की धाराओं से पूरी तरह बरी करने का आदेश जारी किया है। यह फैसला तीन साल से चल रही कानूनी लड़ाई का अंत है, जिसमें आरोपी को अंततः निर्दोष पाया गया।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!