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पंचकूला: 'पुरुष प्रधान देश' वाली टिप्पणी पर महिला थाना SHO और ASI सस्पेंड

हरियाणा के पंचकूला में दहेज उत्पीड़न के एक मामले की सुनवाई के दौरान राज्य मंत्री कृष्णलाल पंवार ने महिला थाना की SHO और ASI को सस्पेंड कर दिया। यह कार्रवाई तब हुई, जब पीड़िता ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान उससे कहा गया, यह पुरुष प्रधान देश है, यहां महिलाओं को सब कुछ सहना पड़ता है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

21 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
पंचकूला: 'पुरुष प्रधान देश' वाली टिप्पणी पर महिला थाना SHO और ASI सस्पेंड
मूल स्रोत

दहेज उत्पीड़न मामले में पुलिस की असंवेदनशीलता पर गिरी गाज

हरियाणा के पंचकूला में दहेज उत्पीड़न के एक मामले की सुनवाई के दौरान राज्य मंत्री कृष्णलाल पंवार ने सख्त रुख अपनाते हुए महिला थाना की SHO और एक ASI को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई पीड़िता द्वारा पुलिस की कार्यप्रणाली और उनके द्वारा की गई अपमानजनक टिप्पणियों के खिलाफ शिकायत के बाद की गई।

पीड़िता का आरोप है कि जब वह अपनी शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंची, तो जांच के दौरान उसे यह कहकर हतोत्साहित किया गया कि 'यह पुरुष प्रधान देश है, यहां महिलाओं को सब कुछ सहना पड़ता है।' इस टिप्पणी ने मामले को और गंभीर बना दिया, जिसके बाद मंत्री ने इसे बेहद असंवेदनशील मानते हुए अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।

जांच में लापरवाही और गवाहों को डराने का आरोप

पीड़िता मनीषा ने आरोप लगाया कि उसके ससुर, जो कि पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं, का नाम जांच अधिकारी ने केस से हटा दिया था। मनीषा का दावा है कि उनके ससुर ने ही 6 लाख रुपये लिए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आरोपी नहीं बनाया। इसके अलावा, मामले की मुख्य गवाह को पुलिस द्वारा नोटिस भेजकर डराने-धमकाने का भी आरोप लगाया गया है।

शिकायत के अनुसार, जब पीड़िता ने इस पक्षपातपूर्ण जांच की शिकायत उच्च अधिकारियों से की, तो मामला ASI कविता को सौंपा गया। पीड़िता का कहना है कि ASI ने उसे न्याय देने के बजाय समाज में व्याप्त पितृसत्तात्मक सोच का हवाला देकर चुप कराने की कोशिश की। बाद में मामले को SI नेहा सिंधू को स्थानांतरित किया गया, जिन्होंने भी पुरानी रिपोर्ट में बदलाव करने से इनकार कर दिया।

मंत्री ने बैठक में लिया कड़ा संज्ञान

सोमवार को आयोजित ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में मंत्री कृष्णलाल पंवार के सामने जब यह मामला आया, तो उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी आपत्ति जताई। मंत्री ने ACP से पूछा कि क्या पुलिस द्वारा गवाह को भेजा गया नोटिस उचित भाषा में था। इस पर पुलिस अधिकारियों ने स्वीकार किया कि नोटिस की भाषा आपत्तिजनक थी।

बैठक के दौरान DCP अदिति ने जांच पूरी होने तक निलंबन टालने का आग्रह किया, लेकिन मंत्री ने स्पष्ट किया कि पुलिस अधिकारियों को कानून का पाठ पढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने SHO राजेश कुमारी और ASI कविता को सस्पेंड कर उनका मुख्यालय भोंडसी निर्धारित करने का आदेश दिया। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि जांच में वे निर्दोष पाई जाती हैं, तो उन्हें बहाल किया जा सकता है।

विवाद की पृष्ठभूमि

पीड़िता मनीषा की शादी 2023 में एक बैंक मैनेजर से हुई थी। आरोप है कि शादी के तुरंत बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा दहेज की मांग की जाने लगी। मनीषा ने बताया कि उसके पिता ने शादी और अन्य रस्मों में भारी खर्च किया था, इसके बावजूद ससुराल वाले लगातार और धन की मांग करते रहे। अंततः उसे घर से निकाल दिया गया और उसके खिलाफ तलाक का मुकदमा दायर कर दिया गया।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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