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पंचकूला: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की कैद, वैज्ञानिक साक्ष्यों ने दिलाई सजा

हरियाणा के पंचकूला की फास्ट ट्रैक विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 16 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में पंचकूला की दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

20 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
पंचकूला: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की कैद, वैज्ञानिक साक्ष्यों ने दिलाई सजा
मूल स्रोत

फास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला

हरियाणा के पंचकूला स्थित फास्ट ट्रैक विशेष पॉक्सो अदालत ने एक नाबालिग किशोरी के साथ दुष्कर्म के मामले में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा न करने पर दोषी को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

यह मामला वर्ष 2024 का है, जिसने क्षेत्र में काफी सनसनी फैला दी थी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे पॉक्सो एक्ट के तहत सूचीबद्ध किया और त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की। फैसला सुनाते समय न्यायाधीश ने पीड़िता के साथ हुई घटना को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा।

क्या था पूरा मामला?

घटना की शुरुआत 12 अप्रैल 2024 को हुई, जब कालका थाना क्षेत्र में एक महिला ने अपनी 16 वर्षीय बेटी के अचानक लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 365 के तहत मामला दर्ज किया और किशोरी की तलाश शुरू की। पुलिस की टीमों ने तकनीकी और मानवीय इनपुट के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया।

लगातार 46 दिनों तक चले गहन तलाशी अभियान के बाद, पुलिस ने 28 मई 2024 को किशोरी को सकुशल बरामद कर लिया। पीड़िता के बयान दर्ज करने के बाद मामले में गंभीर धाराएं जोड़ी गईं। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पॉक्सो अधिनियम की धारा-6 को शामिल किया गया, जो नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के लिए कड़े प्रावधान करती है।

वैज्ञानिक साक्ष्यों और मजबूत पैरवी की भूमिका

इस मामले में सजा सुनिश्चित करने में वैज्ञानिक साक्ष्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस ने पीड़िता की आयु सिद्ध करने के लिए स्कूल के आधिकारिक रिकॉर्ड को अदालत में पेश किया। इसके अलावा, मेडिकल जांच रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्यों को अभियोजन पक्ष ने मजबूती से रखा, जिससे आरोपी के खिलाफ ठोस मामला तैयार हुआ।

अभियोजन पक्ष ने अदालत में प्रभावी पैरवी की और यह सुनिश्चित किया कि दोषी को कानून के दायरे में अधिकतम सजा मिले। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया। यह फैसला नाबालिगों की सुरक्षा के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

न्याय की जीत और भविष्य के लिए संदेश

पंचकूला पुलिस द्वारा 46 दिनों के भीतर किशोरी को बरामद करना और उसके बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा त्वरित न्याय प्रदान करना, इस मामले की सबसे बड़ी विशेषता रही है। पीड़िता के परिवार को इस फैसले से बड़ी राहत मिली है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कड़े फैसलों से समाज में अपराधियों के बीच डर पैदा होगा और नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर लगाम लगेगी।

वर्तमान में दोषी को जेल भेज दिया गया है और अदालत के आदेशानुसार जुर्माना राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह मामला उन सभी के लिए एक उदाहरण है जो कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश करते हैं। पुलिस और न्यायपालिका के समन्वय ने इस मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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