पाली: नाबालिग से छेड़छाड़ मामले में दोषी को 5 साल की सजा, पॉक्सो कोर्ट का फैसला
नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ करने के मामले में पाली की पॉक्सो कोर्ट संख्या एक के जज ने आरोपी को दोषी मानते हुए 5 साल की सजा सुनाई है। कोर्ट की विशिष्ठ लोक अभियोजक उपमा रावल ने बताया कि 3 मार्च 2026 को नाबालिग रात करीब 9 बजे घर के पास कचरा फेंकने गई थी।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

पाली पॉक्सो कोर्ट का सख्त फैसला
राजस्थान के पाली जिले में स्थित पॉक्सो कोर्ट संख्या एक ने एक नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उसे पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां अदालत ने पीड़िता को न्याय दिलाते हुए त्वरित सुनवाई के बाद यह निर्णय लिया है।
घटना 3 मार्च 2026 की रात की है। पीड़िता, जो एक नाबालिग है, रात करीब 9 बजे अपने घर के पास कचरा फेंकने के लिए बाहर निकली थी। इसी दौरान आरोपी ने उसे अकेला पाकर अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश की और उसके साथ छेड़छाड़ की। पीड़िता की चीख-पुकार सुनकर परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे, जिसके बाद आरोपी वहां से फरार हो गया।
घटनाक्रम और कानूनी कार्रवाई
पीड़िता ने घर पहुंचकर अपने परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। घटना के बाद परिवार में भारी आक्रोश था। मामले की गंभीरता को देखते हुए, पीड़ित पक्ष ने 1 अप्रैल 2026 को स्थानीय थाने में आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ठोस सबूत और गवाह पेश किए। कोर्ट की विशिष्ट लोक अभियोजक उपमा रावल ने मामले की पैरवी की। उन्होंने अदालत के समक्ष पीड़िता के बयान और घटनाक्रम को स्पष्ट रूप से रखा, जिसके आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध हुए।
अदालत का फैसला और सजा
सोमवार, 24 अगस्त 2026 को पाली पॉक्सो कोर्ट संख्या एक के न्यायाधीश निहालचंद ने मामले में अपना फैसला सुनाया। 21 वर्षीय आरोपी को नाबालिग के साथ छेड़छाड़ का दोषी माना गया। न्यायाधीश ने आरोपी को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले को नाबालिगों की सुरक्षा के प्रति एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
यह मामला पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज किया गया था, जो बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया है। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए आरोपी को किसी भी प्रकार की नरमी नहीं दी। सजा सुनाए जाने के बाद आरोपी को वापस जेल भेज दिया गया है।
समाज में संदेश
इस फैसले से स्थानीय लोगों में न्याय व्यवस्था के प्रति भरोसा बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में त्वरित सुनवाई और कठोर सजा से समाज में अपराधियों के मन में डर पैदा होता है। पीड़िता और उसके परिवार को इस फैसले से बड़ी राहत मिली है, जिन्होंने पिछले कई महीनों से न्याय के लिए संघर्ष किया था।
कानूनी जानकारों के अनुसार, पॉक्सो कोर्ट का यह निर्णय उन लोगों के लिए एक सबक है जो नाबालिगों को असुरक्षित समझकर अपराध करने का दुस्साहस करते हैं। पुलिस प्रशासन ने भी इस मामले में समय पर जांच पूरी कर चालान पेश किया था, जिससे अदालत को सजा सुनाने में मदद मिली।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!