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पाली: JPMIDA में रोजगार की मांग को लेकर 9 गांवों के किसान उतरे सड़क पर

जोधपुर-पाली-मारवाड़ इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एरिया (JPMIDA) में स्थानीय युवाओं और भूमि प्रभावित परिवारों को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग को लेकर बुधवार को 09 गांवों के किसानों और ग्रामीणों ने औद्योगिक क्षेत्र परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसानों ने टेंट लगाकर विरोध जताया और बाद में उपखंड अधिकारी रोहट पुरण कुमार सैनी को ज्ञापन सौंपा।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

5 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
पाली: JPMIDA में रोजगार की मांग को लेकर 9 गांवों के किसान उतरे सड़क पर
मूल स्रोत

राजस्थान के पाली जिले के रोहट स्थित जोधपुर-पाली-मारवाड़ इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एरिया (JPMIDA) में बुधवार को तनाव की स्थिति देखी गई। औद्योगिक क्षेत्र में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने और भूमि प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता दिलाने की मांग को लेकर नौ गांवों के किसान और ग्रामीण एकजुट हो गए। प्रदर्शनकारियों ने औद्योगिक परिसर में टेंट लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया और प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखीं।

नौ गांवों के किसानों का सामूहिक विरोध

इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से रोहट, निम्बली पटेलान, ढूंढ़ली, निम्बली ब्राह्मणान, दूदली, सिणगारी, दानासनी, दलपतगढ़ और डुंगरपुर गांवों के किसान शामिल हुए। इन सभी गांवों की जमीन औद्योगिक विकास के लिए अधिग्रहित की गई थी, जिसके बाद से ही ग्रामीण अपने भविष्य और रोजगार को लेकर चिंतित थे। ग्रामीणों का कहना है कि जब उनकी उपजाऊ जमीनें उद्योगों के लिए ली गईं, तो अब उन उद्योगों में काम करने का पहला हक भी उन्हीं का होना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने स्पष्ट किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन वे यह चाहते हैं कि इस विकास का लाभ स्थानीय स्तर पर मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा, परिवहन, संविदा और हाउसकीपिंग जैसी सेवाओं में बाहरी लोगों के बजाय स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए। इसके अलावा, प्रत्येक भूमि प्रभावित परिवार के कम से कम एक सदस्य को स्थायी रोजगार देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन

धरने के दौरान ग्रामीणों ने अपनी मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन उपखंड अधिकारी (SDO) रोहट, पुरण कुमार सैनी को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन और औद्योगिक प्रबंधन को यह संदेश दिया गया कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। किसानों का तर्क है कि औद्योगिक क्षेत्र के कारण उनके पारंपरिक रोजगार के साधन खत्म हो गए हैं, ऐसे में अब उन्हें आजीविका के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

इस प्रदर्शन में रोहट व्यापार मंडल के अध्यक्ष वीरमराम गुर्जर समेत हेमाराम विश्नोई, कालू विश्नोई, किशनलाल खिलेरी और वरिंगाराम विश्नोई जैसे स्थानीय नेता और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि स्थानीय युवाओं की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आंदोलन के भविष्य पर नजर

फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि औद्योगिक इकाइयां और स्थानीय प्रशासन उनकी मांगों को नजरअंदाज करते हैं, तो वे अपने आंदोलन को बड़े स्तर पर ले जाएंगे। औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले अन्य लोगों और प्रबंधन के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

JPMIDA जैसे बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में अक्सर स्थानीय रोजगार का मुद्दा एक बड़ा विवाद बनता रहा है। पाली के इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ स्थानीय आबादी के हितों का संरक्षण करना कितना आवश्यक है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और औद्योगिक प्रबंधन इस गतिरोध को खत्म करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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