एनसीआर में पुराने वाहनों पर सुस्त कार्रवाई: 13 एआरटीओ को परिवहन आयुक्त ने दी प्रतिकूल प्रविष्टि
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई में लापरवाही 13 एआरटीओ पर भारी पड़ी है। तय लक्ष्य के मुकाबले बेहद कम वाहनों पर कार्रवाई करने के मामले में परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने एनसीआर के अलग-अलग जिलों में तैनात 13 सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों (एआरटीओ) को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि दी है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

एनसीआर में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ ढिलाई पड़ी भारी
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सड़क से हटाने के अभियान में लापरवाही बरतना 13 सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों (एआरटीओ) के लिए मुसीबत बन गया है। परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने इन अधिकारियों को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि जारी की है। यह कार्रवाई तय लक्ष्यों को पूरा करने में विफलता और अभियान के प्रति उदासीनता के कारण की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की गाइडलाइंस के बावजूद, एनसीआर के कई जिलों में पुराने वाहनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं देखी गई। विभागीय समीक्षा में यह बात सामने आई कि संबंधित अधिकारियों ने न केवल अपने लक्ष्यों को नजरअंदाज किया, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण के प्रति भी गंभीर रुख नहीं अपनाया।
दैनिक लक्ष्य और वास्तविक प्रदर्शन में बड़ा अंतर
परिवहन विभाग द्वारा 13 मार्च 2026 को आयोजित बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि एनसीआर के प्रत्येक जिले में रोजाना कम से कम 500 पुराने वाहनों को जब्त किया जाए। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य 10 साल से पुराने डीजल और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों को सड़क से हटाकर उन्हें अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटरों तक पहुंचाना था ताकि प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सके।
हालांकि, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई हालिया समीक्षा बैठक में जो आंकड़े सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले थे। निर्धारित लक्ष्यों के विपरीत, इन जिलों में अब तक कुल मिलाकर मात्र 666 वाहन ही जब्त किए जा सके हैं। कार्रवाई की यह धीमी गति विभाग के उच्च अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
इन अधिकारियों पर हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई
जिन अधिकारियों को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है, उनमें मेरठ के सुधांशु रंजन, बागपत के विपिन कुमार, और गाजियाबाद के अमित राजन राय, अंकिता शुक्ला, आकांक्षा सिंह पटेल व विनीत कुमार मिश्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त बुलंदशहर की नीतू शर्मा, गौतमबुद्धनगर के अभिषेक कनौजिया, उदित नारायण और नंद कुमार, हापुड़ के रमेश कुमार चौबे, मुजफ्फरनगर के अजय मिश्र तथा शामली के प्रवेश कुमार के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की गई है।
प्रतिकूल प्रविष्टि का अर्थ है कि इन अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड में इस लापरवाही को दर्ज किया जाएगा, जो भविष्य में उनके करियर और पदोन्नति पर सीधा असर डाल सकता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी यदि लक्ष्यों को पूरा करने में इसी तरह की कोताही बरती गई, तो और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए आगे की राह
एनसीआर में वायु गुणवत्ता को सुधारना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। पुराने वाहनों का संचालन प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत माना जाता है, जिसके कारण समय-समय पर सख्त नियम लागू किए जाते हैं। परिवहन विभाग अब इन जिलों में निगरानी बढ़ाने की तैयारी कर रहा है ताकि भविष्य में तय लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।
विभाग के इस कड़े रुख से यह संदेश स्पष्ट है कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों के पालन में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब देखना यह होगा कि इस कार्रवाई के बाद संबंधित जिलों में पुराने वाहनों को जब्त करने की गति में कितनी तेजी आती है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!