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नरसिंहपुर: ई-टोकन व्यवस्था से किसानों की बढ़ी मुसीबत, खाद के लिए 120 किमी का सफर और भारी किराया

नरसिंहपुर जिले में खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन प्रणाली किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। लोकल केंद्रों के बजाय दूरस्थ केंद्रों के टोकन जारी होने के कारण किसानों को खाद लेने के लिए 120 किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ रहा है, जिससे उन पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

25 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
नरसिंहपुर: ई-टोकन व्यवस्था से किसानों की बढ़ी मुसीबत, खाद के लिए 120 किमी का सफर और भारी किराया
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ई-टोकन प्रणाली बनी किसानों के लिए जी का जंजाल

नरसिंहपुर जिले में खाद वितरण को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से लागू की गई ई-टोकन प्रणाली वर्तमान में किसानों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन गई है। खाद प्राप्त करने के लिए किसानों को अपने नजदीकी केंद्रों के बजाय दूर-दराज के केंद्रों के टोकन आवंटित किए जा रहे हैं। इस अव्यवस्था के कारण किसानों को खाद लेने के लिए 100 से 120 किलोमीटर तक की लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ रहा है।

हाल ही में सामने आए एक मामले में गोटेगांव तहसील के तरवारा गांव के निवासी रोशन पटेल को 16 बोरी यूरिया के लिए 120 किलोमीटर दूर स्थित सालीचौका केंद्र का टोकन मिला। खाद लाने के लिए उन्हें ऑटो किराए पर लेना पड़ा, जिसका खर्च 3200 रुपये रहा। इस प्रकार, केवल परिवहन पर ही उन्हें प्रति बोरी 200 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े, जिससे खेती की लागत में भारी वृद्धि हुई है।

स्लॉट बुकिंग में अनिश्चितता और मोबाइल पर निर्भरता

किसानों का कहना है कि ई-टोकन बुकिंग के लिए कोई निश्चित समय निर्धारित नहीं है। स्लॉट कभी भी, दिन या रात के किसी भी समय खुल जाते हैं, जिसके कारण किसानों को 15-15 दिनों तक लगातार अपने मोबाइल फोन पर नजर रखनी पड़ती है। इस अनिश्चितता के कारण कई किसान समय पर टोकन बुक करने से चूक जाते हैं, जिससे उन्हें खाद के लिए और अधिक इंतजार करना पड़ता है।

हीरापुर के किसान मनोज पटेल ने बताया कि उन्हें 40 किलोमीटर दूर सालीचौका केंद्र जाना पड़ा। वहां पहुंचने पर उन्हें परिवहन के लिए ऑटो चालकों को 2000 रुपये तक का किराया देना पड़ा। यह स्थिति केवल एक या दो किसानों की नहीं है, बल्कि जिले के अधिकांश किसान इस अव्यवस्थित प्रणाली के कारण आर्थिक बोझ तले दबे हुए हैं।

फसल पर मंडरा रहा उत्पादन घटने का खतरा

वर्तमान में मक्का की फसल के लिए यूरिया की अत्यंत आवश्यकता है। समय पर खाद न मिलने के कारण फसल की वृद्धि प्रभावित हो रही है, जिससे भविष्य में उत्पादन घटने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। किसान चिंतित हैं कि यदि उन्हें जल्द ही खाद उपलब्ध नहीं हुई, तो उनकी पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है।

स्थानीय किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि ई-टोकन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और स्लॉट बुकिंग का समय निश्चित किया जाए। इसके साथ ही, उनकी मुख्य मांग है कि उन्हें उनके नजदीकी केंद्रों से ही खाद उपलब्ध कराई जाए ताकि उन्हें लंबी दूरी तय न करनी पड़े और परिवहन पर होने वाला अनावश्यक खर्च बच सके।

प्रशासनिक सुधार की दरकार

किसानों का आरोप है कि डिजिटल प्रणाली के नाम पर उन्हें केवल परेशान किया जा रहा है। यदि खाद वितरण केंद्रों का आवंटन भौगोलिक स्थिति के आधार पर किया जाए, तो किसानों की यह समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। फिलहाल, किसान अपनी फसल बचाने के लिए प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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