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अंतरराष्ट्रीय जीवविज्ञान ओलंपियाड में नारनौल की बेटी का कमाल, जीता स्वर्ण पदक

हरियाणा के नारनौल में अटेली क्षेत्र की बेटी भाव्या गुनवाल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और प्रदेश का नाम रोशन करते हुए 37वें अंतरराष्ट्रीय जीवविज्ञान ओलंपियाड (आईबीओ)-2026 में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। लिथुआनिया की राजधानी विलनियस में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारत के सभी चार प्रतिभागियों ने पदक हासिल किए, जिनमें भाव्या एकमात्र स्वर्ण पदक विजेता रहीं।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

20 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
अंतरराष्ट्रीय जीवविज्ञान ओलंपियाड में नारनौल की बेटी का कमाल, जीता स्वर्ण पदक
मूल स्रोत

लिथुआनिया में लहराया भारत का परचम

हरियाणा के नारनौल स्थित अटेली क्षेत्र की रहने वाली मेधावी छात्रा भाव्या गुनवाल ने वैश्विक मंच पर देश का मान बढ़ाया है। लिथुआनिया की राजधानी विलनियस में आयोजित 37वें अंतरराष्ट्रीय जीवविज्ञान ओलंपियाड (आईबीओ)-2026 में भाव्या ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले चारों प्रतिभागियों ने पदक अपने नाम किए, जिनमें भाव्या एकमात्र स्वर्ण पदक विजेता रहीं।

इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय टीम की सराहना करते हुए कहा कि मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, एनिमल फिजियोलॉजी और प्लांट कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी जैसे कठिन विषयों में छात्रों का प्रदर्शन असाधारण रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सफलता देश के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बनेगी।

शिक्षा जगत में भाव्या का शानदार सफर

भाव्या गुनवाल का शैक्षणिक रिकॉर्ड शुरू से ही अत्यंत प्रभावशाली रहा है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान हर कक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। कक्षा 9वीं में 99 प्रतिशत, 10वीं में 97.4 प्रतिशत, 11वीं में 95 प्रतिशत और 12वीं में 98.8 प्रतिशत अंक हासिल कर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे नीट-2026 में ऑल इंडिया रैंक (AIR)-71 के साथ जिले की टॉपर रहीं।

इतना ही नहीं, जेईई मेन्स जैसी कठिन परीक्षा में भी उन्होंने 99.7 पर्सेंटाइल स्कोर किया है, जिसमें फिजिक्स विषय में उन्होंने 100 पर्सेंटाइल अंक प्राप्त किए। उनकी यह सफलता केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी कड़ी मेहनत और विषय के प्रति गहरी समझ का परिणाम है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले भी मिल चुकी है सफलता

भाव्या के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतना कोई नई बात नहीं है। इससे पूर्व वर्ष 2024 में रोमानिया में आयोजित इंटरनेशनल जूनियर साइंस ओलंपियाड में वे स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। वहीं, 2025 में फिलीपींस में आयोजित इंटरनेशनल बायोलॉजी ओलंपियाड में उन्होंने रजत पदक प्राप्त किया था। इसके अलावा, उन्होंने नेशनल मैथ, रीजनिंग और एनएसटीएसई जैसे कई राष्ट्रीय स्तर के ओलंपियाड में भी शीर्ष स्थान हासिल किया है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी भाव्या की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी है। उन्होंने कहा कि भाव्या के साथ-साथ सौमिल मैती, निशित कलानी और अनमोल कुमार की मेहनत और समर्पण देश के लिए गर्व का विषय है। मुख्यमंत्री ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

सामाजिक सरोकार और भविष्य की राह

अपनी शैक्षणिक व्यस्तताओं के बावजूद भाव्या सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहती हैं। वे जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाने का कार्य भी करती हैं, जो उनके व्यक्तित्व के संवेदनशील पहलू को दर्शाता है। उनकी यह उपलब्धि न केवल नारनौल और हरियाणा के लिए गौरव की बात है, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल है।

भाव्या की यह सफलता साबित करती है कि यदि सही दिशा में मेहनत की जाए, तो वैश्विक स्तर पर किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। अब हर किसी की नजरें उनके भविष्य के शैक्षणिक और करियर संबंधी निर्णयों पर टिकी हैं, जहां वे अपनी प्रतिभा से और भी कीर्तिमान स्थापित कर सकती हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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