नालंदा के सरमेरा टाल में गंगा का कहर: 200 बीघे धान की फसल जलमग्न, किसानों की बढ़ी चिंता
नालंदा की लोकाइन और पंचाने नदी में गंगा का पानी का चुका है। सरमेरा प्रखंड के टाल इलाके में गंगा का बैकवाटर तेजी से फैल रहा है, जिससे बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

सरमेरा टाल में गंगा के बैकवाटर से तबाही
नालंदा जिले के सरमेरा प्रखंड में बाढ़ के हालात गंभीर हो गए हैं। गंगा नदी का बैकवाटर तेजी से टाल क्षेत्र में फैल रहा है, जिससे स्थानीय किसानों की कमर टूट गई है। चेरो पंचायत के पेंदी गांव से लेकर पूर्वी टाल क्षेत्र के खेतों में गंगा का पानी घुसने से लगभग 5 फीट तक जलजमाव हो गया है। इस जलभराव के कारण किसानों की करीब 200 बीघे में लगी धान की तैयार फसल पूरी तरह डूब गई है, जिससे भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
पेंदी गांव के मुहाने पर स्थित कई रिहायशी घर भी पानी से घिर गए हैं, जिससे ग्रामीणों का जनजीवन प्रभावित हुआ है। पानी का बहाव अब पुरानी इसुआ गांव की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन से मदद की गुहार लगाई गई है।
मुआवजे की मांग और प्रशासन की सक्रियता
फसल बर्बादी को लेकर किसानों में भारी आक्रोश और चिंता है। प्रखंड 20 सूत्री क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष विजय प्रसाद ने जिलाधिकारी से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल फसल क्षति का सर्वेक्षण कराया जाए। उन्होंने जोर दिया कि किसानों को उनकी बर्बाद हुई फसल का उचित मुआवजा मिलना चाहिए ताकि वे इस आर्थिक संकट से उबर सकें।
दूसरी ओर, जिले की अन्य नदियों की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। लोकाइन, पंचाने, भूतही और सकरी जैसी नदियों का जलस्तर घटने से लोगों ने राहत की सांस ली है। उदेरा स्थान बराज के सभी गेट बंद कर दिए जाने के कारण लोकाइन नदी में अतिरिक्त पानी का बहाव रुक गया है, जिससे हिलसा और एकंगरसराय जैसे क्षेत्रों पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा फिलहाल टल गया है।
नूरसराय में सासी नदी का तटबंध क्षतिग्रस्त
एक तरफ जहां सरमेरा में बाढ़ का पानी कहर बरपा रहा है, वहीं नूरसराय प्रखंड की नदिऔना पंचायत में सासी नदी का छिलका (तटबंध) अचानक टूट गया। इस घटना से सिंचाई के लिए रखा गया पानी व्यर्थ बहने लगा, जिससे पांच मौजा के किसानों की सिंचाई व्यवस्था ठप हो गई है। धान की खेती के लिए पानी की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
सूचना मिलते ही प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ. जियाउल हक और अंचलाधिकारी दीपक कुमार ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के साथ मिलकर युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही तटबंध को ठीक कर लिया जाएगा ताकि किसानों को सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति फिर से बहाल की जा सके।
आगे की स्थिति और राहत कार्य
फिलहाल प्रशासन प्रभावित इलाकों पर कड़ी नजर बनाए हुए है। गंगा के जलस्तर में हो रही वृद्धि के कारण निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि, अन्य नदियों के शांत होने से प्रशासन को राहत मिली है, लेकिन टाल क्षेत्र में जमा पानी की निकासी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही नुकसान का आकलन पूरा कर राहत राशि जारी करेगा ताकि वे अगली बुवाई के लिए तैयारी कर सकें।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!