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नागौर में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई पर बवाल: ठेकेदारों ने पुलिस पर लगाया मारपीट और तोड़फोड़ का आरोप

मंगलवार रात पुलिस ने दो अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को हिरासत में लिया। वहीं कार्रवाई से नाराज शराब ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि शिकायत लेकर कोतवाली पहुंचे तो आबकारी विभाग के सीआई ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और धमकाते हुए वहां से जाने को कहा।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

9 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
नागौर में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई पर बवाल: ठेकेदारों ने पुलिस पर लगाया मारपीट और तोड़फोड़ का आरोप
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नागौर में देर रात पुलिस की दबिश से मचा हड़कंप

राजस्थान के नागौर जिले में अवैध शराब बिक्री के खिलाफ पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। मंगलवार देर रात पुलिस की क्यूआरटी टीम ने दो अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें पांच लोगों को हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई के बाद से स्थानीय शराब ठेकेदारों में भारी आक्रोश है और उन्होंने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

घटनाक्रम के अनुसार, पहली कार्रवाई जोधपुर बाइपास क्षेत्र में की गई, जहां सार्वजनिक स्थान पर शराब का सेवन करने के आरोप में चार लोगों को पकड़ा गया। इसके बाद पुलिस ने बीकानेर फाटक ओवरब्रिज के पास स्थित एक शराब की दुकान पर दबिश दी। पुलिस का दावा है कि दुकान निर्धारित समय सीमा के बाद भी खुली थी, जिसके चलते वहां मौजूद सेल्समैन को हिरासत में लिया गया।

ठेकेदारों का दावा: दरवाजा तोड़कर की गई मारपीट

शराब ठेकेदारों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि क्यूआरटी टीम ने दुकान के अंदर सो रहे सेल्समैन सुखाराम जाट को जबरन बाहर निकाला। ठेकेदारों का आरोप है कि पुलिस ने दुकान का दरवाजा तोड़कर सेल्समैन के साथ मारपीट की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया है। दुकान मालिक का कहना है कि तोड़फोड़ के दौरान दुकान में रखी शराब की बोतलें और अन्य सामान भी क्षतिग्रस्त हुआ है।

आक्रोशित ठेकेदारों ने देर रात कोतवाली थाने पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ठेकेदारों का तर्क है कि यदि दुकान बंद थी, तो जबरन घुसने का कोई औचित्य नहीं था।

प्रशासनिक अधिकारियों के विरोधाभासी बयान

इस मामले में आबकारी सीआई बाबूलाल जलवाणियां ने स्पष्ट किया है कि रात आठ बजे के बाद शराब की दुकानें बंद कराने का अधिकार पुलिस के पास है और वे इस कार्रवाई का समर्थन करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि दुकानों में तोड़फोड़ करना या किसी के साथ मारपीट करना गलत है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि तोड़फोड़ की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।

दूसरी ओर, सीओ जतिन जैन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने केवल निर्धारित समय के बाद खुली दुकानों पर नियमानुसार कार्रवाई की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की गई है और मारपीट की जानकारी उनके पास नहीं है।

आगे की स्थिति

फिलहाल, इस मामले ने स्थानीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। पुलिस और ठेकेदारों के बीच का यह विवाद अब जांच का विषय बन गया है। जहां पुलिस इसे कानून व्यवस्था बनाए रखने की सामान्य प्रक्रिया बता रही है, वहीं ठेकेदार इसे पुलिस की मनमानी करार दे रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है कि वे इस विवाद का समाधान कैसे निकालते हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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