मुजफ्फरपुर मशरूम क्लस्टर घोटाला: जीविका दीदियों का अनशन समाप्त, 19 अगस्त को होगी सुनवाई
एसडीओ पूर्वी आनंद उत्सव धरना स्थल पर पहुंचे और पानी पिलाकर जीविका दीदियों का अनशन समाप्त कराया। एसडीओ पूर्वी के न्यायालय में वाद दायर किया गया है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

मुजफ्फरपुर में मशरूम क्लस्टर के नाम पर हुए कथित वित्तीय घोटाले और कर्ज के बोझ से परेशान जीविका दीदियों का दो दिवसीय अनशन बुधवार देर रात समाप्त हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर में चल रहे इस प्रदर्शन को समाप्त कराने के लिए एसडीओ पूर्वी आनंद उत्सव मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारी महिलाओं को पानी पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। इस आश्वासन के बाद कि उनकी मांगों पर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, महिलाएं अपने घरों को लौट गईं।
एसडीओ कोर्ट में वाद दायर, 19 अगस्त को अगली सुनवाई
प्रशासनिक अधिकारियों और जीविका दीदियों के बीच हुई बैठक के बाद एसडीओ पूर्वी के न्यायालय में एक औपचारिक वाद दायर किया गया है। इस मामले में छह जीविका दीदियों को वादी बनाया गया है, जबकि प्रतिवादी पक्ष में ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी, उसके निदेशक आशुतोष मंगलम, जीविका डीपीएम अनीशा गांगुली और उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक की बोचहां व मुशहरी शाखाओं के प्रबंधकों को शामिल किया गया है। न्यायालय ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को सुबह 11 बजे निर्धारित की गई है।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने महिलाओं को भरोसा दिलाया है कि अगले 90 दिनों के भीतर मशरूम क्लस्टर का निर्माण कार्य विधिवत शुरू कर दिया जाएगा। महिलाओं की अन्य समस्याओं के समाधान के लिए भी प्रशासन ने उचित कार्रवाई का वादा किया है। गौरतलब है कि 11 अगस्त से छह महिलाएं अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठी थीं, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
करोड़ों का कर्ज और खराब हुआ सिविल स्कोर
पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि 2023 में मशरूम उत्पादन के नाम पर उनके नाम से करोड़ों का लोन लिया गया, लेकिन उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिला। मुशहरी और बोचहां की 110 जीविका दीदियों के नाम पर कुल 3.32 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ था। महिलाओं का आरोप है कि लोन की राशि उनके खातों में आते ही ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी ने विड्रॉल फॉर्म पर हस्ताक्षर करवाकर पूरी रकम निकाल ली। योजना धरातल पर नहीं उतरी और अब ब्याज समेत यह बकाया राशि बढ़कर करीब 5.70 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
इस स्थिति के कारण महिलाओं के बैंक खाते एनपीए (NPA) हो गए हैं और उनका सिविल स्कोर भी खराब हो गया है, जिससे उन्हें भविष्य में किसी अन्य ऋण सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है। कई महिलाओं को बैंक से लगातार नोटिस मिल रहे हैं, जबकि उनके पास न तो रोजगार का कोई साधन है और न ही लोन की राशि।
डेढ़ साल से चल रहा है आश्वासन का दौर
यह मामला 11 अलग-अलग संकुलों की महिलाओं से जुड़ा है, जिनमें संगम, सर्वोत्तम, मौसम, उत्तम, माला और दीपमाला जैसे समूह शामिल हैं। पिछले डेढ़ वर्षों में प्रशासनिक स्तर पर डेढ़ दर्जन से अधिक बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। डीडीसी और एसडीओ स्तर पर हुई इन बैठकों में बार-बार समयसीमा तय की गई, लेकिन क्लस्टर शुरू नहीं हो सका। 31 जुलाई 2026 को हुई बैठक में 10 अगस्त तक काम शुरू करने का वादा किया गया था, लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ, तो महिलाओं ने मजबूरन भूख हड़ताल का रास्ता अपनाया।
अब जबकि मामला एसडीओ की अदालत में पहुंच चुका है, प्रभावित महिलाएं उम्मीद कर रही हैं कि उन्हें इस कर्ज के जाल से मुक्ति मिलेगी और दोषी एजेंसी व अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। प्रशासन के लिए अब 19 अगस्त की सुनवाई एक बड़ी चुनौती होगी, जहां उन्हें इस पूरे वित्तीय प्रबंधन और अनियमितताओं का जवाब देना होगा।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!