मुजफ्फरपुर कोर्ट में फर्जी स्टांप का बड़ा खेल: वेब सीरीज से प्रेरित होकर शुरू किया धंधा, तीन गिरफ्तार
मुजफ्फरपुर कोर्ट परिसर में नकली ज्यूडिशियल स्टांप, वेलफेयर टिकट और कोर्ट फीस स्टांप बेचने के मामले में पुलिस ने शुक्रवार शाम तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया। पूछताछ के बाद शनिवार को तीनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मुजफ्फरपुर जिला अदालत परिसर में फर्जी ज्यूडिशियल स्टांप, वेलफेयर टिकट और कोर्ट फीस स्टांप बेचने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। नगर थाना पुलिस ने इस मामले में शुक्रवार शाम तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। शनिवार को सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस घटना ने कोर्ट परिसर की सुरक्षा और दस्तावेजों की प्रमाणिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वेब सीरीज से मिली प्रेरणा का एंगल
पुलिस जांच के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि आरोपी 'स्कैम 2003: द तेलगी स्टोरी' वेब सीरीज से प्रभावित थे। प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने कम समय में अधिक पैसा कमाने के लालच में इस वेब सीरीज को देखने के बाद नकली स्टांप का कारोबार शुरू करने की योजना बनाई थी। हालांकि, पुलिस अभी इस बात की पुष्टि कर रही है कि क्या वे वास्तव में इस सीरीज से प्रेरित थे या पहले से ही किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा थे।
जांच अधिकारी मुन्ना कुमार के अनुसार, आरोपियों से रिमांड पर पूछताछ की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह अवैध कारोबार कब से चल रहा था और इसके पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि नकली स्टांप तैयार करने के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल किया गया और इनकी छपाई कहां हो रही थी।
सस्ते दाम पर असली बताकर बेचते थे फर्जी दस्तावेज
पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी 100 रुपये का नकली ज्यूडिशियल स्टांप मात्र 20 रुपये में खरीदते थे और उसे असली बताकर ग्राहकों को बेचते थे। इसी तरह 50 रुपये का वेलफेयर टिकट महज 10 रुपये में खरीदकर बाजार में खपाया जा रहा था। आरोपी असली स्टांप की स्कैन कॉपी का उपयोग करके नकली दस्तावेज तैयार करते थे। मुरारी कुमार की दुकान से छापेमारी के दौरान 100 रुपये मूल्य के 12 नकली ज्यूडिशियल स्टांप भी बरामद किए गए हैं।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामकृष्ण ठाकुर के पास एक व्यक्ति एफिडेविट लेकर पहुंचा। अध्यक्ष को स्टांप की गुणवत्ता देखकर संदेह हुआ और उन्होंने अपने जूनियर को सत्यम की दुकान से स्टांप मंगवाकर जांच की। संदेह सही पाए जाने पर बार एसोसिएशन ने तुरंत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश और प्रशासन को सूचित किया, जिसके बाद नगर थाने में चार दुकानदारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
इस मामले में मुरारी कुमार, प्रभात कुमार, राजेश कुमार और सत्यम को नामजद किया गया है। पुलिस ने शुक्रवार को मुरारी, प्रभात और राजेश को गिरफ्तार कर लिया, जबकि सत्यम की तलाश में छापेमारी जारी है। इसके अलावा चार अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और सप्लाई चेन का पता लगाया जा सके।
पुलिस अब इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रही है कि नकली स्टांप का यह नेटवर्क कितना बड़ा है और क्या इसमें कोर्ट के भीतर के किसी व्यक्ति की मिलीभगत है। रिमांड के दौरान मिलने वाली जानकारियों के आधार पर पुलिस इस पूरे रैकेट की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास करेगी। फिलहाल, कोर्ट परिसर में इस घटना के बाद हड़कंप मचा हुआ है और दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाने की मांग उठ रही है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!