मध्य प्रदेश में चीनी की जमाखोरी पर लगाम, सरकार ने तय की स्टॉक की नई सीमा
शक्कर के बढ़ते दामों के बीच राज्य सरकार ने शक्कर की राशनिंग तय कर दी है। इसमें कहा गया है कि प्रदेश में कोई भी डीलर 4 हजार क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रखेगा।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार का बड़ा कदम
मध्य प्रदेश में चीनी की बढ़ती कीमतों और बाजार में कृत्रिम कमी को रोकने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने प्रदेश भर के डीलरों के लिए चीनी के भंडारण की सीमा निर्धारित कर दी है। इस नए आदेश के तहत अब कोई भी डीलर एक निश्चित मात्रा से अधिक चीनी का स्टॉक अपने पास नहीं रख सकेगा।
सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, प्रदेश में किसी भी डीलर के लिए 4 हजार क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक रखना प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके साथ ही, इस स्टॉक को 30 दिनों से अधिक समय तक भंडारित करने पर भी रोक लगा दी गई है। यह निर्णय बाजार में चीनी की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने और जमाखोरी को हतोत्साहित करने के लिए लिया गया है।
पोर्टल पर स्टॉक की जानकारी देना अनिवार्य
नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने डीलरों को भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल पर अपने स्टॉक की स्थिति को नियमित रूप से अपडेट करने का निर्देश दिया है। सभी जिला कलेक्टरों को इस आदेश का कड़ाई से पालन कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो डीलर इन नियमों का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, इस आदेश में कुछ विशेष छूट भी दी गई है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से वितरित होने वाली चीनी, या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत किसी प्राधिकारी के माध्यम से रखे गए स्टॉक पर यह सीमा लागू नहीं होगी। इससे सरकारी वितरण व्यवस्था पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
हलवाई और मिठाई विक्रेताओं के लिए भी नियम
सरकार ने केवल थोक डीलरों ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर चीनी का उपयोग करने वाले थोक उपभोक्ताओं के लिए भी नियम तय किए हैं। इसमें हलवाई, मिठाई विक्रेता, शीतल पेय निर्माता और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग शामिल हैं। जो भी संस्थान कच्चे माल के रूप में हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग करते हैं, उन्हें 15 दिनों से अधिक की खपत के बराबर स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी।
विभाग के अनुसार, थोक उपभोक्ता की श्रेणी में वे संस्थान आएंगे जिन्होंने पिछले एक वर्ष के दौरान (चालू माह को छोड़कर) औसत मासिक खपत के रूप में न्यूनतम 100 मीट्रिक टन चीनी का उपयोग किया है। इन उद्योगों को भी अपनी खपत और स्टॉक की जानकारी का रिकॉर्ड रखना होगा ताकि बाजार में चीनी की आपूर्ति श्रृंखला सुचारू बनी रहे।
बाजार पर क्या होगा असर
सरकार के इस फैसले से बाजार में चीनी की जमाखोरी पर लगाम लगने की उम्मीद है। अक्सर देखा जाता है कि त्योहारों या मांग बढ़ने के समय कुछ व्यापारी स्टॉक जमा कर लेते हैं, जिससे कीमतों में अचानक उछाल आता है। नई स्टॉक सीमा लागू होने से माल की आवक बनी रहेगी और कीमतों में स्थिरता आने की संभावना है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में मंडियों और गोदामों की औचक जांच की जा सकती है। यदि कोई भी डीलर या थोक उपभोक्ता निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक के साथ पाया जाता है, तो उसे जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार का मुख्य लक्ष्य आम उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर चीनी उपलब्ध कराना है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!