मध्य प्रदेश: कॉन्स्टेबल बैंड भर्ती प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की रोक, इंटरव्यू परिणामों पर लगी पाबंदी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने कांस्टेबल (बैंड) भर्ती प्रक्रिया में इंटरव्यू के लिए उम्मीदवारों को बुलाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने फिलहाल इंटरव्यू के परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने राज्य में चल रही कॉन्स्टेबल (बैंड) भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने भर्ती के तीसरे चरण यानी इंटरव्यू के परिणाम घोषित करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह निर्णय एक याचिकाकर्ता द्वारा चयन प्रक्रिया में अपनाए गए तौर-तरीकों पर सवाल उठाने के बाद लिया गया है।
याचिकाकर्ता निलेश सिंह ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उन्होंने भर्ती परीक्षा के पहले और दूसरे चरण को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण किया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि विभाग ने भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट किया था कि कुल पदों की संख्या के तीन गुना उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए आमंत्रित किया जाएगा, जबकि वास्तविकता में केवल दो गुना उम्मीदवारों को ही मौका दिया गया।
सरकार और याचिकाकर्ता के बीच कानूनी बहस
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश हुए डिप्टी एडवोकेट जनरल सुदीप भार्गव ने आरोपों का खंडन किया। सरकार का तर्क है कि भर्ती के लिए निर्धारित नियमों और प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया है। सरकार ने यह भी दलील दी कि इंटरव्यू की प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है, इसलिए अब किसी नए उम्मीदवार को शामिल करने का निर्देश देना उचित नहीं होगा।
याचिकाकर्ता ने यह भी मुद्दा उठाया कि विभाग ने अब तक पात्र उम्मीदवारों की कोई आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं की है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि उन्हें भी इंटरव्यू प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दी जाए ताकि उनके साथ न्याय हो सके।
अदालत का रुख और आगामी सुनवाई
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। अदालत ने सरकार से पूछा है कि इंटरव्यू के लिए उम्मीदवारों का चयन किस आधार पर किया गया और इसकी पूरी प्रक्रिया क्या रही है। इस संबंध में स्पष्टीकरण देने के लिए सरकार को एक सप्ताह का समय दिया गया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस मामले की अगली सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक इंटरव्यू के परिणाम घोषित नहीं किए जाएंगे। मामले की अगली सुनवाई सितंबर के दूसरे सप्ताह में निर्धारित की गई है। इस आदेश के बाद अब राज्य सरकार को उन सभी दस्तावेजों और चयन सूची का विवरण पेश करना होगा, जिसके आधार पर उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया था।
यह मामला राज्य में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि क्या भर्ती प्रक्रिया में कोई विसंगति थी या सरकार द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पूरी तरह से वैध थी।
इस कानूनी हस्तक्षेप के बाद, उन सभी उम्मीदवारों के लिए उम्मीद की किरण जगी है जो चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिए गए थे। यदि अदालत सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं होती है, तो भविष्य में भर्ती प्रक्रिया में बड़े बदलाव या पुनर्मूल्यांकन के आदेश भी दिए जा सकते हैं।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!