मध्यप्रदेश के राज्यपाल का कार्यकाल समाप्त होने पर हाईकोर्ट में सुनवाई, फैसला सुरक्षित
जुलाई 2026 को मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल का कार्यकाल खत्म हो चुका है, उसके बाद से अभी तक एमपी में किसी भी राज्यपाल की नियुक्ति नहीं हुई है, जिसको लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है, जल्द ही इसका निर्णय आ सकता है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

राज्यपाल के पद पर नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट में याचिका
मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल का पांच साल का निर्धारित कार्यकाल 8 जुलाई 2026 को पूरा हो चुका है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी राज्य में नए राज्यपाल की नियुक्ति न होने के कारण यह मामला अब कानूनी पचड़े में फंस गया है। इस विषय को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिस पर मंगलवार को सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
याचिकाकर्ता डॉ. एबी खान, जो जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं, ने अपनी याचिका में संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दिया है। उन्होंने तर्क दिया है कि संविधान के अनुच्छेद 153 के तहत प्रत्येक राज्य में राज्यपाल का होना अनिवार्य है और उनका कार्यकाल पांच वर्ष का तय होता है। कार्यकाल पूरा होने के बाद भी पद खाली न रहने देने के लिए नई नियुक्ति की प्रक्रिया समय पर पूरी होनी चाहिए थी।
याचिकाकर्ता की मांग और सरकार का पक्ष
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजय रायजादा ने अदालत के समक्ष दलील दी कि चूंकि राज्यपाल का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, इसलिए संवैधानिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को कार्यवाहक राज्यपाल का प्रभार सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रपति के सचिव और विधि मंत्रालय को इस मामले में पक्षकार बनाते हुए जल्द से जल्द उचित निर्णय लेने की मांग की है।
वहीं, मामले की सुनवाई के दौरान भारत सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और डिप्टी सॉलिसिटर जनरल अदालत में उपस्थित हुए। सरकार की ओर से संविधान के अनुच्छेद 156 का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया गया कि जब तक नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक पूर्व राज्यपाल अपने पद पर बने रह सकते हैं। यह संवैधानिक प्रावधान पद की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।
अदालत का रुख और भविष्य की स्थिति
जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनीं। याचिकाकर्ता ने पूर्व के उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी स्थितियों में मुख्य न्यायाधीश को कार्यवाहक प्रभार देने की परंपरा रही है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया कि वर्तमान स्थिति में संवैधानिक प्रक्रिया के तहत पद पर बने रहने का प्रावधान मौजूद है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत का निर्णय क्या होगा और क्या केंद्र सरकार जल्द ही किसी नए नाम की घोषणा करेगी। राज्यपाल का पद राज्य की कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख होता है, इसलिए इस मामले पर आने वाला फैसला प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मंगुभाई पटेल ने 8 जुलाई 2021 को मध्यप्रदेश के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। पांच साल की अवधि पूरी होने के बाद अब राज्य में नए संवैधानिक प्रमुख की नियुक्ति की प्रक्रिया पर सबकी नजरें बनी हुई हैं। हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आगे की संवैधानिक प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!