ब्रेकिंग
अंबाला में निर्माणाधीन इमारत ढही: लेंटर डालते समय हुआ हादसा, 4 मजदूरों की दर्दनाक मौतगोरखपुर: सोशल मीडिया पर व्यूज पाने के लिए बनाया पुलिसकर्मी को पीटने का फर्जी वीडियो, दो गिरफ्तारभोपाल में आम आदमी पार्टी का शक्ति प्रदर्शन: भाजपा के 20 साल के शासन को बताया विफलपटना में गैराज मालिक की निर्मम हत्या, देर रात दुकान से लौटते वक्त बदमाशों ने बरसाईं गोलियांगर्लफ्रेंड से मिलने रायगढ़ आया युवक बना बाइक चोर, पेट्रोल खत्म होने पर वाहन छोड़ हो जाता था फरारमुरादाबाद में खूंखार तेंदुए का आतंक: वन विभाग के जाल में फंसा 20वां तेंदुआ, ग्रामीणों ने ली राहत की सांसचंडीगढ़ में नशा तस्करों पर प्रशासन का कड़ा प्रहार, अवैध संपत्तियों पर चला बुलडोजरपंचकूला में साइबर ठगी का नया तरीका: बिना OTP और लिंक के महिला के खाते से उड़े 4.86 लाख रुपये
अंबाला में निर्माणाधीन इमारत ढही: लेंटर डालते समय हुआ हादसा, 4 मजदूरों की दर्दनाक मौतगोरखपुर: सोशल मीडिया पर व्यूज पाने के लिए बनाया पुलिसकर्मी को पीटने का फर्जी वीडियो, दो गिरफ्तारभोपाल में आम आदमी पार्टी का शक्ति प्रदर्शन: भाजपा के 20 साल के शासन को बताया विफलपटना में गैराज मालिक की निर्मम हत्या, देर रात दुकान से लौटते वक्त बदमाशों ने बरसाईं गोलियांगर्लफ्रेंड से मिलने रायगढ़ आया युवक बना बाइक चोर, पेट्रोल खत्म होने पर वाहन छोड़ हो जाता था फरारमुरादाबाद में खूंखार तेंदुए का आतंक: वन विभाग के जाल में फंसा 20वां तेंदुआ, ग्रामीणों ने ली राहत की सांसचंडीगढ़ में नशा तस्करों पर प्रशासन का कड़ा प्रहार, अवैध संपत्तियों पर चला बुलडोजरपंचकूला में साइबर ठगी का नया तरीका: बिना OTP और लिंक के महिला के खाते से उड़े 4.86 लाख रुपये

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बदहाल व्यवस्था: हाईकोर्ट ने सरकार को दी चार सप्ताह की मोहलत

मध्य प्रदेश में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए दो महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन कई सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को अब भी बिजली, शुद्ध पेयजल, शौचालय, बाउंड्रीवॉल, यूनिफॉर्म और सुरक्षित भवन जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर दायर जनहित याचिका की सुनवाई शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में हुई।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor In Chief

21 अगस्त 20262 मिनट पढ़ें
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बदहाल व्यवस्था: हाईकोर्ट ने सरकार को दी चार सप्ताह की मोहलत
मूल स्रोत

सरकारी स्कूलों की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में व्याप्त बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए दो महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन राज्य के कई सरकारी विद्यालयों में आज भी बिजली, शुद्ध पेयजल, शौचालय, सुरक्षित भवन और बाउंड्रीवॉल जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव बना हुआ है। विद्यार्थियों को मिल रही इन सुविधाओं की कमी को लेकर दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई।

जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जवाब दाखिल न किए जाने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सरकार को मामले का समाधान खोजने और अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय प्रदान किया है। इससे पूर्व, कोर्ट ने 17 अगस्त तक जवाब पेश करने का निर्देश दिया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी सरकार की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।

याचिकाकर्ता ने उठाए शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

सेंधवा के सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता बीएल जैन ने 22 अप्रैल को यह जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता के वकील अभिषेक तुगनावत ने कोर्ट को सूचित किया कि पिछली सुनवाई (1 जुलाई) के दौरान मिले निर्देशों के बावजूद सरकार ने अब तक कोई ठोस जवाब पेश नहीं किया है। याचिका में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और प्राचार्यों के बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं, जिससे शिक्षण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उन्हें पढ़ाई के बजाय अपनी मांगों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी खबरें सामने आ रही हैं जहां नन्हे विद्यार्थी हाथों में तख्तियां लेकर अपनी स्कूल की जर्जर इमारतों और सुविधाओं की कमी के खिलाफ प्रदर्शन करने को मजबूर हैं।

सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न

याचिकाकर्ता का तर्क है कि सरकार की ओर से जवाब देने में हो रही देरी से समस्या का समाधान और अधिक जटिल होता जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि राज्य और केंद्र सरकार को इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। सरकारी स्कूलों में खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जानी चाहिए ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। इसके साथ ही, जर्जर भवनों की मरम्मत और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए बजट का आवंटन सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

कोर्ट ने अब इस मामले को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई में सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि प्रदेश के लाखों बच्चों के भविष्य से भी सीधा जुड़ा हुआ है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के अगले आदेश और सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं।

SponsoredMushfan Digital Studios - We Build Brands. We Grow Businesses.

टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

संबंधित खबरें