मिर्जापुर: सरकारी CHC के पुराने भवन में मिलीं निजी दवाओं की 19 पेटियां, प्रशासन ने सील किया कमरा
मिर्जापुर के राजगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में निजी दवाओं के कथित अवैध भंडारण की शिकायत पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। पुराने अस्पताल भवन के एक बंद कमरे से लाखों रुपये की 19 पेटी दवाएं बरामद हुईं।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित राजगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में उस समय हड़कंप मच गया जब अस्पताल के पुराने भवन में निजी दवाओं का जखीरा बरामद हुआ। प्रशासन को मिली गुप्त सूचना और शिकायतों के आधार पर की गई छापेमारी में एक बंद कमरे से दवाओं की 19 पेटियां जब्त की गई हैं। इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायत के बाद प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
यह पूरा मामला प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र के संचालक रूपक द्वारा दी गई शिकायत के बाद प्रकाश में आया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि CHC के भीतर मरीजों को सस्ती जन औषधि दवाओं के बजाय निजी स्टोर से महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी मड़िहान ने मामले का संज्ञान लिया और जांच के आदेश दिए।
आदेश के अनुपालन में नायब तहसीलदार राहुल कुमार मिश्रा के नेतृत्व में एक प्रशासनिक टीम पुलिस बल के साथ राजगढ़ CHC पहुंची। शाम करीब पांच बजे शुरू हुई यह कार्रवाई रात साढ़े सात बजे तक चली। टीम ने अस्पताल के पुराने भवन के एक बंद कमरे का ताला तोड़कर तलाशी ली, जहां से निजी दवाओं की 19 पेटियां बरामद हुईं। मौके पर ही पंचनामा तैयार कर इन दवाओं को प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया है।
अस्पताल परिसर में निजी दवाओं का भंडारण क्यों?
सरकारी अस्पताल परिसर के भीतर निजी दवाओं का मिलना कई तरह की आशंकाओं को जन्म देता है। प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि ये दवाएं किसकी हैं और इन्हें किस उद्देश्य से सरकारी भवन में छिपाकर रखा गया था। प्रशासनिक टीम ने बरामदगी के बाद डॉक्टर अजीत कुमार केसरवानी की मौजूदगी में उस कमरे को सील कर दिया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतलाल मरीजों को निजी स्टोर से दवाएं लेने के लिए प्रेरित करते थे और बिना बिल के दवाओं की बिक्री का खेल चल रहा था। इन आरोपों के बाद अब जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध भंडारण के पीछे कौन-कौन से अधिकारी या कर्मचारी शामिल हैं।
अधीक्षक ने दी सफाई
इस मामले पर जब CHC अधीक्षक डॉ. संतलाल से संपर्क किया गया, तो उन्होंने अपनी अनभिज्ञता जाहिर की। उन्होंने बताया कि वे पिछले चार दिनों से चंदौली में आधिकारिक विजिट पर हैं और उन्हें इस छापेमारी की जानकारी नहीं है। हालांकि, उनकी अनुपस्थिति में अस्पताल परिसर में हुई इस बड़ी बरामदगी ने उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल, प्रशासन ने सील किए गए कमरे और बरामद दवाओं के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी अस्पतालों में निजी दवाओं का अवैध कारोबार चल रहा है, तो यह गरीब मरीजों के साथ सीधा धोखा है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!