स्टाइपेंड बढ़ोतरी की मांग पर अड़े मेडिकल इंटर्न्स, 24 जुलाई से कार्य बहिष्कार की चेतावनी
मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस इंटर्न्स और भावी इंटर्न्स ने गुरुवार को स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर राजधानी भोपाल में बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। 9 जुलाई से प्रदेशभर में चल रहा है आंदोलन

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

भोपाल में मेडिकल इंटर्न्स का बड़ा शक्ति प्रदर्शन
मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत एमबीबीएस इंटर्न्स और भावी डॉक्टरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राजधानी भोपाल में एक बड़ा प्रदर्शन किया है। अपनी स्टाइपेंड राशि में वृद्धि की मांग को लेकर करीब 1200 से अधिक मेडिकल विद्यार्थियों और इंटर्न्स ने हमीदिया अस्पताल से कलेक्ट्रेट तक मार्च निकाला। यह प्रदर्शन राज्य भर में चिकित्सा शिक्षा विभाग के खिलाफ बढ़ते असंतोष को दर्शाता है।
इंटर्न्स का कहना है कि वे लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि अन्य राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश में इंटर्न्स को मिलने वाली राशि काफी कम है, जबकि वे अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
9 जुलाई से जारी है आंदोलन का सिलसिला
यह आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ है, बल्कि 9 जुलाई से प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इसका सिलसिला चल रहा है। भोपाल के अलावा जबलपुर, सागर, रीवा, इंदौर और दतिया जैसे शहरों में भी इंटर्न्स ने अपने स्तर पर विरोध दर्ज कराया है। इस दौरान पदयात्रा, बाइक रैली और काली पट्टी बांधकर विरोध करने जैसे कई लोकतांत्रिक तरीके अपनाए गए, ताकि सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जा सके।
इंटर्न्स के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री के कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक दस्तक दी है। 14 जुलाई को लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री के कार्यालय में ज्ञापन दिया गया था, जिसके बाद राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल से भी मुलाकात की गई। 20 जुलाई को अपर मुख्य सचिव और चिकित्सा शिक्षा आयुक्त के साथ भी चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।
24 जुलाई से काम बंद करने की चेतावनी
सरकार के उदासीन रवैये से नाराज इंटर्न्स ने अब कड़ा रुख अपना लिया है। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो 24 जुलाई से प्रदेशभर के एमबीबीएस इंटर्न्स चिकित्सीय कार्यों का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा है कि जब तक उन्हें सम्मानजनक स्टाइपेंड नहीं मिल जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
इस संभावित कार्य बहिष्कार से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इंटर्न्स का तर्क है कि महंगाई के इस दौर में वर्तमान स्टाइपेंड उनके दैनिक खर्चों और पढ़ाई के लिए पर्याप्त नहीं है। वे लंबे समय से इसे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं ताकि वे बिना किसी आर्थिक तनाव के मरीजों की सेवा कर सकें।
प्रशासन और सरकार पर दबाव
अब गेंद पूरी तरह से राज्य सरकार के पाले में है। एक तरफ जहां इंटर्न्स अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग के सामने अस्पतालों में व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है। यदि 24 जुलाई से इंटर्न्स काम पर नहीं लौटते हैं, तो ओपीडी और अन्य चिकित्सा सेवाओं पर इसका सीधा असर पड़ना तय है।
आंदोलनकारी इंटर्न्स का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई स्पष्ट आश्वासन न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार समय रहते इस मामले में हस्तक्षेप करती है या फिर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो जाएंगी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!