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मऊ: जन्मतिथि में हेरफेर कर नौकरी कर रहे सहायक शिक्षक पर गिरी गाज, सेवा से बर्खास्त

मऊ में जन्मतिथि में हेरफेर कर नौकरी हासिल करने पर बीएसए ने सहायक शिक्षक संजय कुमार को बर्खास्त कर दिया है। जांच में सामने आया कि शिक्षक ने अलग-अलग वर्षों में हाईस्कूल की परीक्षा देते समय अपनी जन्मतिथि अलग-अलग दर्ज कराई थी।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor In Chief

14 अगस्त 20262 मिनट पढ़ें
मऊ: जन्मतिथि में हेरफेर कर नौकरी कर रहे सहायक शिक्षक पर गिरी गाज, सेवा से बर्खास्त
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उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में शिक्षा विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जीवाड़े के आरोपी सहायक शिक्षक को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। कंपोजिट विद्यालय अपड़िया हरिपरा में तैनात सहायक अध्यापक संजय कुमार पर आरोप था कि उन्होंने अपनी जन्मतिथि में हेरफेर कर सरकारी नौकरी हासिल की थी। बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) द्वारा की गई गहन जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि शिक्षक ने अपने शैक्षिक दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की थी।

तीन अलग-अलग जन्मतिथियों का खुलासा

शिक्षक के खिलाफ मिली शिकायतों के आधार पर जब विभाग ने जांच शुरू की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पाया गया कि संजय कुमार ने हाईस्कूल की परीक्षा तीन अलग-अलग वर्षों—1998, 1999 और 2003—में दी थी। इन तीनों वर्षों के परीक्षा रिकॉर्ड में उनकी जन्मतिथि अलग-अलग दर्ज पाई गई। इतना ही नहीं, जब उन्होंने सरकारी नौकरी के लिए आवेदन किया, तो उस समय उन्होंने अपनी जन्मतिथि 1988 दर्ज कराई थी, जो उनके शैक्षिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रही थी।

विभागीय अधिकारियों ने मामले की पुष्टि के लिए विक्ट्री इंटर कॉलेज से वर्ष 1998, 1999 और 2003 के हाईस्कूल परीक्षार्थियों की प्रमाणित सूची मंगवाई। इस सूची का मिलान करने पर यह प्रमाणित हो गया कि शिक्षक ने जानबूझकर अपनी जन्मतिथि में विसंगतियां पैदा की थीं ताकि वे नौकरी पाने के योग्य बन सकें।

स्पष्टीकरण देने में रहे विफल

दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया और उनसे स्पष्टीकरण मांगा। हालांकि, संजय कुमार विभाग को कोई भी संतोषजनक जवाब देने में पूरी तरह विफल रहे। इसके बाद विभाग ने उनके वेतन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी और दोहरीघाट के खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) मुकेश कुमार को मामले की जांच का जिम्मा सौंपा गया।

जांच अधिकारी को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। इस दौरान शिक्षक को अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त अवसर दिए गए, लेकिन वे अपने शैक्षिक अभिलेखों में मौजूद विसंगतियों को सही साबित करने में असमर्थ रहे।

हाईकोर्ट तक पहुंचा था मामला

इस कानूनी प्रक्रिया के दौरान शिक्षक ने राहत पाने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया। कोर्ट में विभाग की ओर से सभी संबंधित शैक्षिक दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। बचाव पक्ष ने भी अपनी दलीलें रखीं, लेकिन न्यायालय के समक्ष भी शिक्षक अपने दावों को पुख्ता नहीं कर सके। अंततः, न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में और विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर बीएसए संतोष कुमार उपाध्याय ने संजय कुमार की सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया।

यह मामला सरकारी नौकरियों में शैक्षिक दस्तावेजों की सत्यता की जांच की महत्ता को दर्शाता है। मऊ के शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई से उन लोगों में हड़कंप मच गया है जो गलत दस्तावेजों के सहारे सरकारी पदों पर काबिज हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी यदि किसी अन्य शिक्षक के दस्तावेजों में विसंगति पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी इसी तरह की कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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