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मध्य प्रदेश चावल घोटाला: महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ तक फैले तार, पूर्व मंत्री के करीबियों पर शिकंजा

एमपी के एथेनॉल प्लांट का चावल महाराष्ट्र–छत्तीसगढ़ में बिका। पूर्व मंत्री कांवरे की मिल घोटाले का सेंटर पांइट, 14 राइस मिलर्स के खिलाफ सबूत मिले।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

25 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
मध्य प्रदेश चावल घोटाला: महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ तक फैले तार, पूर्व मंत्री के करीबियों पर शिकंजा
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मध्य प्रदेश में गरीबों और कुपोषित बच्चों के लिए आवंटित 1160 करोड़ रुपये के फोर्टिफाइड चावल के घोटाले की आंच अब राज्य की सीमाओं से बाहर निकलकर महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ तक पहुंच गई है। जांच में खुलासा हुआ है कि छिंदवाड़ा स्थित एवीजे एथेनॉल प्लांट के नाम पर जारी किया गया चावल इन पड़ोसी राज्यों की राइस मिलों में खपाया जा रहा था।

पूर्व मंत्री के परिवार की मिल बनी जांच का केंद्र

इस पूरे मामले में बालाघाट के पूर्व मंत्री और भाजपा जिलाध्यक्ष रामकिशोर कांवरे के परिवार की 'हर्ष इंडस्ट्रीज' का नाम मुख्य रूप से सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में मिल के पार्टनर विनोद शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसियों को टेकाड़ी गांव स्थित इस मिल से एथेनॉल प्लांट के लिए आवंटित चावल मिलने के पुख्ता डिजिटल सबूत मिले हैं। सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर जब्त किए जाने के बाद पुलिस ने इस मिल को घोटाले का सेंटर पॉइंट माना है।

सूत्रों के अनुसार, पूर्व मंत्री के भाई और भतीजे से भी पुलिस ने कई दौर की पूछताछ की है। हालांकि, जब इस संबंध में पूर्व मंत्री रामकिशोर कांवरे से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। चर्चा है कि उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन सरकार ने जांच में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है।

कैसे हुआ घोटाले का खुलासा

घोटाले की परतें 2 जून को तब खुलनी शुरू हुईं, जब नवेगांव वेयरहाउस से छिंदवाड़ा के एथेनॉल प्लांट के लिए रवाना किए गए चावल के तीन ट्रक अपने गंतव्य तक नहीं पहुंचे। जांच में पता चला कि एक ट्रक बालाघाट की संचेती राइस मिल में पहुंच गया था। इसके बाद पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने मामले की गहन पड़ताल शुरू की, जिसमें अब तक 18 रसूखदार लोगों को आरोपी बनाया गया है और 12 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

जांच का दायरा अब यह पता लगाने पर केंद्रित है कि एथेनॉल उत्पादन के नाम पर 50 लाख मीट्रिक टन चावल के आवंटन में नियमों को किसने और कैसे दरकिनार किया। एफसीआई का दिल्ली मुख्यालय और क्षेत्रीय कार्यालय भी इस मामले में समानांतर जांच कर रहे हैं।

राज्य सरकार ने पल्ला झाड़ा

इस गंभीर मामले पर राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इसमें राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि एफसीआई और एथेनॉल प्लांट केंद्र सरकार के अधीन आते हैं, इसलिए यह विषय पूरी तरह से केंद्रीय एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में है।

फिलहाल, 20 सदस्यीय एसआईटी की टीम पिछले 50 दिनों से सबूत जुटाने में लगी है। बालाघाट के एफसीआई मैनेजर ने भी क्षेत्रीय प्रबंधक को पत्र लिखकर राइस मिलों और गोदामों की संदिग्ध भूमिका के बारे में सूचित किया है। आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है, जिससे कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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