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प्रधानमंत्री आवास योजना: भूमिहीनों को जमीन देने में मध्य प्रदेश का शानदार प्रदर्शन, 96 फीसदी लक्ष्य पूरा

प्रदेश में चिह्नित 38,490 भूमिहीन परिवारों में से 36,890 परिवारों को जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है। यानी 95.84%, करीब 96% भूमिहीन परिवारों को घर बनाने के लिए जमीन मिल चुकी है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

22 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
प्रधानमंत्री आवास योजना: भूमिहीनों को जमीन देने में मध्य प्रदेश का शानदार प्रदर्शन, 96 फीसदी लक्ष्य पूरा
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भूमिहीनों को पक्का घर देने की दिशा में बड़ी उपलब्धि

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के अंतर्गत भूमिहीन परिवारों को अपना घर बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने के मामले में मध्य प्रदेश ने देशभर में दूसरा स्थान हासिल किया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में चिह्नित किए गए कुल भूमिहीन परिवारों में से लगभग 96 प्रतिशत को जमीन का आवंटन किया जा चुका है। यह उपलब्धि राज्य सरकार की आवासीय योजनाओं की सफलता को दर्शाती है।

राज्य में कुल 38,490 भूमिहीन परिवारों को पात्र के रूप में चिह्नित किया गया था। इनमें से 36,890 परिवारों को अब तक जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो मध्य प्रदेश 95.84 प्रतिशत के साथ दूसरे पायदान पर है, जबकि छत्तीसगढ़ 99.81 प्रतिशत के साथ इस सूची में शीर्ष पर बना हुआ है। वर्तमान में प्रदेश के केवल 4.16 प्रतिशत यानी 1,600 परिवार ही ऐसे हैं जिन्हें जमीन मिलने का इंतजार है।

संख्या और प्रतिशत का गणित

यदि कुल संख्या के आधार पर तुलना की जाए, तो मध्य प्रदेश देश में चौथे स्थान पर आता है। महाराष्ट्र, राजस्थान और असम जैसे राज्य संख्या के मामले में मध्य प्रदेश से आगे हैं, जहां बड़ी संख्या में परिवारों को जमीन आवंटित की गई है। हालांकि, जब बात कुल चिह्नित परिवारों के मुकाबले वितरण के प्रतिशत की आती है, तो मध्य प्रदेश का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि राज्य प्रशासन ने पात्र लाभार्थियों तक पहुंचने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं।

पीएमएवाई-जी के तहत मध्य प्रदेश के लिए कुल 57.74 लाख आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। अब तक राज्य में 54.18 लाख से अधिक आवासों को स्वीकृति मिल चुकी है, जिनमें से 43.78 लाख घरों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। हालांकि, अभी भी करीब 13.96 लाख आवासों का निर्माण कार्य शेष है, जिसे पूरा करने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना की भूमिका

मध्य प्रदेश में भूमिहीन परिवारों को जमीन मुहैया कराने की प्रक्रिया को गति देने में 'मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना' की अहम भूमिका रही है। जनवरी 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा टीकमगढ़ से शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को 600 वर्गफीट तक की आवासीय जमीन का पट्टा बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराना था। इस योजना के माध्यम से सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि सरकारी जमीन उपलब्ध न होने की स्थिति में जमीन खरीदकर भी पात्र परिवारों को दी जाए।

योजना के शुभारंभ के दौरान टीकमगढ़ में ही 10,918 हितग्राहियों को पट्टे वितरित किए गए थे। उस समय राज्य भर से लगभग 14 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे, जो इस योजना की व्यापक मांग को प्रदर्शित करते हैं। हालांकि, वर्तमान में SAARA पोर्टल पर इस योजना के लिए आवेदन की प्रक्रिया और डैशबोर्ड की उपलब्धता को लेकर स्थिति बदली हुई है।

भविष्य की राह और लक्ष्य

केंद्र सरकार ने पीएमएवाई-जी के दूसरे चरण के तहत मार्च 2029 तक देश भर में अतिरिक्त दो करोड़ आवास बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए राज्यों को पर्याप्त निधि आवंटित करने के साथ-साथ नियमित समीक्षा और डैशबोर्ड के माध्यम से निगरानी की जा रही है। ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण और कार्यशालाओं के जरिए निर्माण कार्यों में तेजी लाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

देश भर के आंकड़ों पर नजर डालें तो 6 अगस्त 2026 तक लगभग 5.62 लाख भूमिहीन परिवार पात्र पाए गए थे, जिनमें से 3.26 लाख परिवारों को अब तक जमीन मिल चुकी है। शेष परिवारों को जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है। मध्य प्रदेश का प्रदर्शन इस दिशा में अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण बना हुआ है, जिससे यह उम्मीद है कि आने वाले समय में राज्य के शेष भूमिहीन परिवार भी अपने पक्के घर के सपने को साकार कर सकेंगे।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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