मध्य प्रदेश के 13 नगर निगमों में एल्डरमैन की नियुक्ति, भोपाल को मिले 12 मनोनीत पार्षद
प्रदेश सरकार ने स्थानीय निकायों में राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला फिर शुरू करते हुए भोपाल सहित 13 नगर निगमों में एल्डरमैन (नामनिर्दिष्ट पार्षद) नियुक्त कर दिए हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने शनिवार को आदेश जारी किए।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के स्थानीय शहरी निकायों में राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को गति देते हुए 13 नगर निगमों में एल्डरमैन यानी नामनिर्दिष्ट पार्षदों की नियुक्ति कर दी है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा इस संबंध में आधिकारिक आदेश शनिवार को जारी किए गए। इस कदम को स्थानीय निकायों में पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रतिनिधित्व देने और प्रशासनिक कामकाज को सुदृढ़ करने की दिशा में देखा जा रहा है।
भोपाल सहित 13 निगमों में नई नियुक्तियां
जारी आदेश के अनुसार, भोपाल नगर निगम में सबसे अधिक 12 एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं। इसके अलावा मुरैना, सागर, रीवा, सतना, सिंगरौली, कटनी, छिंदवाड़ा, खंडवा, बुरहानपुर, उज्जैन, देवास और रतलाम नगर निगम में 8-8 एल्डरमैन नामित किए गए हैं। इन नियुक्तियों के साथ ही संबंधित निकायों में अब जन प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ गई है, जिससे स्थानीय विकास कार्यों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होगी।
हालांकि, राज्य के तीन प्रमुख नगर निगमों—इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर—में फिलहाल एल्डरमैन की नियुक्तियां नहीं की गई हैं। इन शहरों में नियुक्तियों को अभी होल्ड पर रखा गया है, जिसके कारण राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। माना जा रहा है कि इन निकायों में नियुक्तियों को लेकर जल्द ही कोई निर्णय लिया जा सकता है।
प्रमुख शहरों में नामित पार्षदों की सूची
विभिन्न नगर निगमों में नियुक्त किए गए एल्डरमैन में स्थानीय स्तर के पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी गई है। मुरैना में ऊषा बौंदिल, राजेन्द्र राठौर और अरविंद भदौरिया समेत 8 लोगों को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, सागर में महेश जैन, धर्मेंद्र रजक और जुगल प्रजापति जैसे नामों को शामिल किया गया है। रीवा, सतना और सिंगरौली जैसे निगमों में भी स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नियुक्तियां की गई हैं।
इसी प्रकार, कटनी, खंडवा और बुरहानपुर में भी 8-8 नामनिर्दिष्ट पार्षदों को नियुक्त किया गया है। उज्जैन, देवास और रतलाम में भी सरकार ने अपने समर्थकों को एल्डरमैन के रूप में जगह दी है। इन नियुक्तियों से संबंधित निकायों के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है, क्योंकि एल्डरमैन के पास भी पार्षदों के समान ही विकास कार्यों में सुझाव देने और अपनी बात रखने का अधिकार होता है।
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव
एल्डरमैन की नियुक्ति का सीधा असर नगर निगम की बैठकों और समितियों पर पड़ता है। ये मनोनीत सदस्य निगम की कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार का यह निर्णय लंबे समय से लंबित नियुक्तियों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे उन कार्यकर्ताओं को भी संतुष्ट करने का प्रयास किया गया है जो लंबे समय से संगठन और पार्टी के लिए सक्रिय रहे हैं।
आगामी दिनों में इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में होने वाली नियुक्तियों पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। इन शहरों में नियुक्तियों में देरी के पीछे के कारणों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन बड़े निकायों के लिए पार्टी आलाकमान से विचार-विमर्श के बाद ही सूची जारी की जाएगी।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी इन सूचियों के बाद संबंधित नगर निगमों में अब प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। नामित पार्षदों को जल्द ही शपथ दिलाई जाएगी, जिसके बाद वे आधिकारिक रूप से अपने दायित्वों का निर्वहन शुरू कर सकेंगे। राज्य सरकार की इस पहल से स्थानीय निकायों में कामकाज की गति बढ़ने और जन समस्याओं के निराकरण में तेजी आने की संभावना है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!