मध्य प्रदेश में बैंक हड़ताल: पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर 40 हजार कर्मचारी आज काम से दूर
मध्य प्रदेश में आज, शुक्रवार को बैंक हड़ताल है। 5 डे वीक वर्किंग यानी, पांच दिवसीय सप्ताह की मांग को लेकर प्रदेश के करीब 40 हजार बैंककर्मी काम नहीं करेंगे।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

प्रदेश भर में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित
मध्य प्रदेश में शुक्रवार को बैंक कर्मचारियों की एक दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल के कारण बैंकिंग कामकाज पूरी तरह ठप रहने की संभावना है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर आयोजित इस प्रदर्शन में प्रदेश के करीब 40 हजार बैंककर्मी शामिल हो रहे हैं। इस हड़ताल के कारण राज्य की लगभग 7 हजार शाखाओं में ताले लटक सकते हैं, जिससे आम जनता को वित्तीय लेनदेन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
हड़ताल का असर केवल शुक्रवार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव अगले तीन दिनों तक महसूस किया जाएगा। चूंकि शनिवार और रविवार को बैंकों में पहले से ही साप्ताहिक अवकाश होता है, इसलिए आम ग्राहकों को अपनी बैंकिंग जरूरतों के लिए सोमवार तक का इंतजार करना पड़ सकता है। भोपाल सहित राज्य के प्रमुख शहरों में बैंक कर्मचारी एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करेंगे।
मुख्य मांग: पांच दिवसीय कार्य सप्ताह
बैंक यूनियनों की सबसे प्रमुख मांग बैंकों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करना है। वर्तमान में बैंकों में महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहता है, लेकिन कर्मचारी अब हर शनिवार को छुट्टी की मांग कर रहे हैं। इस बदलाव के बदले में यूनियनों ने सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन कामकाज के समय में 40 मिनट की बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव रखा है, ताकि ग्राहकों को सेवा देने में कोई कमी न आए।
यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार इस जायज मांग को अनावश्यक रूप से लंबित रख रही है। सरकार के साथ हुई वार्ता के कई दौर अब तक बेनतीजा रहे हैं, जिसके कारण कर्मचारियों को हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है। यदि सरकार समय रहते सकारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो भविष्य में और भी बड़े आंदोलन किए जा सकते हैं।
अन्य लंबित मुद्दे और विरोध
पांच दिवसीय कार्य सप्ताह के अलावा, बैंककर्मी कई अन्य मांगों को लेकर भी लामबंद हैं। इनमें पेंशन अपडेशन, पेंशनभोगियों के लिए एक्स-ग्रेशिया की समीक्षा, और एनपीएस (NPS) को ओपीएस (OPS) में बदलने जैसी महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं। इसके साथ ही, बैंकों में क्लर्क, सब-स्टाफ और सुरक्षा गार्डों की पर्याप्त भर्ती न होने का मुद्दा भी कर्मचारी संगठनों द्वारा उठाया गया है।
यूनियनों ने स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू की गई पीएलआई (PLI) योजना का भी कड़ा विरोध किया है। उनका आरोप है कि यह योजना कर्मचारियों के बीच भेदभाव पैदा करती है और केवल एक छोटे वर्ग को अनुचित लाभ पहुंचाती है। कर्मचारियों का मानना है कि वेतन संशोधन समझौते को पूरा करने से पहले इन सभी लंबित मुद्दों का समाधान करना अनिवार्य है।
आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है परेशानी
बैंक ग्राहकों के लिए आने वाला समय और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सितंबर के अंत में एक बार फिर बैंकों में लगातार छुट्टियों का दौर आने वाला है। 26 और 27 सितंबर को शनिवार-रविवार का अवकाश है, जिसके बाद 28 से 30 सितंबर तक फिर से हड़ताल की घोषणा की गई है। इस तरह, महीने के अंत में लगातार पांच दिनों तक बैंक बंद रह सकते हैं, जिससे चेक क्लियरेंस और नकद निकासी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों पर गहरा असर पड़ सकता है।
फिलहाल, सरकार और बैंक यूनियनों के बीच गतिरोध बना हुआ है। जब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक बैंकिंग सेवाओं के बाधित रहने की आशंका बनी रहेगी। ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी जरूरी वित्तीय योजनाएं इन छुट्टियों और हड़ताल की तारीखों को ध्यान में रखकर ही बनाएं।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!